


महाड़ । परम पूज्य शासन प्रभावक आचार्य देवेश श्रीमद्विजय ऋषभचंद्र सूरीश्वरजी महाराजा साहेब के सुशिष्य प्रवचन दक्ष विशिष्ट मंत्राराधक मुनिराज श्री रजतचंद्र विजयजी महाराज साहेब एवं मंगलचंद्र विजयजी का मंगलमय चातुर्मास चल रहा है । जब से गुरुदेव श्री का महाड़ नगर में आगमन हुआ है,नगर ज्ञानमय तपोंमय भक्तिमय बन गया है। यशस्वी भव्य आयोजन किए जा रहे हैं। महाड़ नगर में एक नया इतिहास स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जा रहा है ।
20 दिवसीय 10 यतिधर्म तप आराधना में करीब 40 तपस्वीं ने भाग लिया है। गुरुदेव श्री ने सोमवार को पहला क्षमागुण यतिधर्म पर मार्मिक करुणा से भरा हुआ प्रवचन दिया सुनने वाले श्रोताओं की आंखों में अश्रु धारा बह निकली । प्रवचन के पश्चात् सभी तपस्वी को सामुहिक पच्चक्खाण गुरुदेव श्री ने करवाया।
इसी प्रकार तप की कड़ी में महाड़ के ही श्रावक नवरत्नजी देरासरिया की धर्मपत्नी श्रीमती सज्जनबेन ने नव उपावास की तपस्या की है, जिनका पारणा बुधवार 27 जुलाई को किया जाएगा। इसी तरह से अनेक लोग प्रवचन का लाभ तपस्या का लाभ ज्ञान शिविर का लाभ विशिष्ट वंदनावली का लाभ ले रहे हैं।
प्रतिदिन आकर्षक गहुंलियां बनाई जा रही है एवं मंगल गीत गाए जा रहे हैं। इंदौर से आए प्रीतिबेन विनोदजी खाबीया ने सुंदर स्तवन गीत प्रस्तुत कर सबको मोहित किया। प्रतिदिन प्रवचन के पश्चात प्रभावना का लाभ भी श्रद्धालु ले रहे हैं।
आगामी रक्षाबंधन पर्व पूर्णिमा दिनांक 12 अगस्त शुक्रवार के शुभ दिन विशिष्ट रिद्धि सिद्धि लब्धिवंत मंत्र एवं स्त्रोत द्वारा महामांगलिक का विराट आयोजन किया गया है। जिसके लाभार्थी नागोठाना के परम गुरुभक्त प्रकाशचंदजी केवलसामुथा परिवार है। एमपी,महाराष्ट्र,राजस्थान एवं कोंकण क्षेत्र के श्रीसंघ एवं गुरुभक्त पधार कर लाभ ले रहे हैं। सबकी सुंदर स्वामीभक्ति का लाभ श्रीसंघ एवं गुरु समर्पण चातुर्मास समिति विशिष्ठ सम्मान पूर्वक कर रही है। कई आराधकों को और भी कठिन आराधना चल रही है। उन सभी में पधारने का समिति एवं श्रीसंघ ने निवेदन किया है।