रतलाम । महापुरुषों के गुणानुवाद करते हुए यदि जीव में उत्कृष्ट रसायन के भाव आ जाए तो वह जीव आत्मा तीर्थंकर गौत्र का उपार्जन कर लेती है। हमारी आस्था के केंद्र परम् पूज्य उपाध्याय की आज 109वीं जन्म जयंती है। राजस्थान भीलवाड़ा के कोशीथल ग्राम में पिता जवाहर लाल कोठारी माता कंकुबाई थे । आपका नाम प्यारचंद एंव छोटे भाई का नाम वक्तावरमल था। भवी आत्मा जल्द से जल्द संयम की और अग्रसर होती है। मात्र 11 वर्ष की उम्र में आपने जगत वल्लभ जैन दिवाकर श्री चौथमलजी मसा से संयम अंगीकार किया आपके साथ आपके छोटे भाई वक्तावरमल (बंशीमुनि) और माता कंकुबाई ने भी संयम ग्रहण किया एक साथ तीन तीन दीक्षाएं सम्पन्न हुई। आपका नाम केवल मुनि रखा गया। जैन दिवाकर जी के 44 शिष्य थे आप उनके अंतिम शिष्य थे। क अक्षर ने उनके जीवन में कमाल का कार्य किया माता का नाम कंकु बाई, गौत्र कोठारी, केशरी नन्दन* ने दिक्षा दी, जाव जीवन कंचन कामिनी का त्याग किया नाम केवल मुनि। दिक्षा के पश्चात विहार यात्रा प्रारम्भ की, कश्मीर से कन्याकुमारी तक विहार किये। साहित्य सृजन में आपका विशेष योगदान रहा। आपने कई समधुर गुरु भक्ति के गीतों की रचना करी ।
उस जमाने में व्यक्ति नावेल उपन्यास बहुत अधिक पड़ते थे। आत्मा में विकार जगाने वाले उपन्यास, हिंसा जगाने वाले उपन्यास। केवल मुनि जी ने इस बारे में सोचा औऱ धार्मिक कथाओं पर आधारित उपन्यास लिखना प्रारंभ किया। जैन धर्म में स्थानकवासी सम्प्रदाय में उपन्यास लिखने वाले वो प्रथम सन्त थे।
पूज्य गुरुदेव मालव केसरी उपाध्याय श्री कस्तूरचंद मसा के पश्चात आचार्य सम्राट श्री आँनन्द ऋषि जी ने केवल मुनि जी को उपाध्याय पदवी प्रदान की। उनका चातुर्मास करवाने के लिये कई संघ लालायित रहते थे। कर्नाटक का बैंगलोर श्रीसंघ उनके पास चातुर्मास की विनती लेकर उपस्थित हुआ, मसा ने वँहा के संघ के बारे में पता किया तो पता चला की वँहा के संघ में फूट है, वर्षों से संघ दो भागों में बंटा हुआ है, मसा ने फरमाया की जँहा संघ में फूट हो वँहा मैं चातुर्मास नही करूँगा, अगर मेरा चातुर्मास चाहिए तो पहले अपना झगड़ा सुलझाओ और उनकी प्रेरणा से बेंगलोर संघ का वर्षों पुराना विवाद खत्म हो गया।
गुरुदेव को प्रवचन के दौरान जब किसी ने विवाद खत्म होने का समाचार दिया तो उन्होंने वंही पर बैठे बैठे एक गीत की रचना करी संगठन की वीणा बजने दो मुझे मधुर मधुर संगीत सुनने दो । अपने गुरु श्री जैन दिवाकर जी मसा के प्रति उनकी अटूट श्रद्धा थी, गुरुदेव की भक्ति में उन्होंने अनेक कालजयी भजन लिखे । उनके सदुपदेश और प्रेरणा से बैंगलोर में युवतियों के लिये महावीर कालेज की स्थापना करवाई, इंदौर में जैन दिवाकऱ विद्या निकेतन, जैन दिवाकऱ क्षात्रावास नीमच ऐसी अनेक संस्थाओं की स्थापना करवाई। उनका स्वभाव बहुत सरल था, शिष्यों से कभी मन मुटाव नही हुआ। वो हमेशा शिक्षा देते थे की गुरुवाणी पर सम्यक श्रद्धा रखकर उसका आचरण करना।
गुरु वचन पर कभी शंका नही करना, अपनी बात मनवाने के लिए गुरु से कभी आग्रह नही करना। ऐसे पूज्य गुरुदेव की आज 109वीं जन्म जयंती हम सामायिक तप एंव तेले की आराधना करके मना रहे है। संघरत्न इन्दरमल जैन ने बताया की आज के जाप मदनलाल जी बापूलाल जी खमेसरा के निवास स्थान शास्त्रीनगर पर हुए कल दिनाँक 28 जुलाई के जाप सुभाषजी जैन तरसिंग परिवार नीमचौक पर होंगे। साथ ही परम पूज्य आचार्य सम्राट आँनन्द ऋषि मसा की जन्म जयंती पर गुणावुवाद सामायिक एंव सामूहिक तेले तप का आयोजन होगा। संघ में संघ अमित नेहा जी कटारिया के आज सजोड 15 उपवास एंव कई तपस्वियों की गुप्त तपस्या चल रही है।