तपस्वी सौम्या पगारिया के तप का बहुमान तप से किया गया

  • दोयती के बहुमान का लाभ नानीजी रंजनादेवी झामर ने लिया
  • सामूहिक चौवीसी स्तुति का आयोजन भी हुआ

रतलाम। एक छोटा… सा नवकारसी जैसा तप करना भी हर किसी के लिए सरल नहीं हैं। वहीं जब किसी की पुण्यवानी होती है, परिवार के संस्कार होते हैं और किसी भी रूप में अंतराय नहीं आती हैं। तब कहीं जाकर प्रेरणा मिलने के साथ तपस्या करने का विचार आकर तपस्या की जाती हैं। ऐसे में किसी बालिका द्वारा 11 उपवास करना अनुकरणीय, अनुमोदनीय साधुवाद योग्य हैं। यहां त्रिपोलिया गेट रोड़ पर स्थित श्री जैन श्वेतांबर खतरगच्छ उपाश्रय में श्री जिनकुशलसुरीजी की दिव्य कृपा से परम पूज्य श्री विचक्षण ज्योति मालवमणि प्रवर्तनी पूज्या महासती श्री चंद्रप्रभाजी की शिष्याएं पूज्या महासती श्री विजयप्रभा श्रीजी, पूज्या महासती श्री पुण्यनिधिजी, पूज्या महासती श्री रत्नानिधिजी एवं पूज्या महासती श्री प्रज्ञानिधिजी ठाणा 4 के वर्षावास के दौरान प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं व बच्चें साध्वी वृंद के दर्शन, वंदन, व्याख्यान, मांगलिक आदि का उत्साहपूर्वक लाभ ले रहे हैं। साध्वी वृंद के सानिध्य में जप, तप, धर्म, ध्यान, ज्ञान आदि विभिन्न आराधनाएं हो रही हैं। साध्वी वृंद की पावन प्रेरणा से श्रावक-श्राविकाएं एवं बच्चें भी अपनी शारीरिक शक्ति का उपयोग कर तपस्या में रमण कर रहे हैं। इसी के अंतर्गत यहां सुभाषचंद्र श्रीकांता पगारिया की पौत्री एवं सुदर्शन सारिका पगारिया की पुत्री कु. सौम्या पगारिया ने निराहार रहते केवल अचित (गरम) जल के आधार पर 11 उपवास की कठोर तपस्या पूर्ण की। तपस्वी सौम्या की तपस्या के उपलक्ष्य में 9 अगस्त को जयकार यात्रा निकालकर मंदिरजी पहुंची एवं वहां तपस्वी सौम्या ने भगवानजी के दर्शन एवं चैत्य वंदन किया। इसी दिन त्रिपोलिया गेट रोड़ पर स्थित श्री जैन श्वेतांबर खतरगच्छ उपाश्रय में सामूहिक चौवीसी स्तुति का आयोजन हुआ। इसमें बड़ी संख्या में श्राविकाओं ने उपस्थित होकर मधुर स्वर में चौवीसी तीर्थंकर भगवान की स्तुति की।
नानीजी ने दोयती के तप का बहुमान तप से किया
साध्वी मंडल की निश्रा में तप का बहुमान तप से करने की परंपरा का निर्वाह करते हुए तपस्वी की नानीजी रंजनादेवी अशोक झामर जावरा ने सर्वाधिक खुले खुले 61 उपवास करने की बोली लेकर तपस्वी को पारणा करने का लाभ लिया, टाप के अनुमोदनार्थ श्रीसंघ की ओर से तपस्वी सौम्या पगारिया का बहुमान किया गया। इस दौरान समूची धर्मसभा तपस्वी सौम्या एवं बहुमान करने वाले रंजनादेवी की जयकारों से गुंजायमान हो गई।