रतलाम । नरक, तिर्यंच औऱ देवलोक के जीव दान नही कर सकते है, केवल मनुष्य ही दान दे सकता है। दान मोक्ष का मार्ग है। अतिथी, साधर्मी का स्वागत सत्कार करना, कोई व्यक्ति समाज के कार्य से आए तो अपनी हैसियत के अनुसार दान जरूर करना चाहिए। सुपात्र दान से तीर्थंकर गौत्र का बंध हो सकता है। शुद्ध भावों से दिया गया दान ही सच्चा दान होता है। व्यवसाय में दोगुना, खेती में सौ गुणा और उत्कृष्ट भाव से दिया गया दान असंख्य गुणा होकर मिलता है।
संघ आपके पास आया और आपने दे दिया तो वो दूध बराबर, माँगने पर दिया तो पानी बराबर और खींचकर लिया तो खून बराबर। जब जब तीर्थंकर दिक्षा लेते है तो दिक्षा के पूर्व पूरे वर्षभर तक वो करोड़ो स्वर्ण मुद्राओं का दान करते है ।
इतिहास के पन्नो पर दगड़ूशाह, भामाशाह ऐसे कई दानवीरों के उदाहरण भरे पड़े है, भामाशाह ने साढे बारह वर्षों तक सैनिकों के लिये अपना खजाना खोल कर भरपूर दान दिया था। आज आपकी जितनी उम्र है मात्र उतने रुपए जीवदया की पेटी में डाल कर जाइयेगा। शतावधानी पूज्याश्री गुरु कीर्ति जी मसा ने कहा कि देवो को भी प्यारा है जिनशासन हमारा ये भोगियों का नही त्यागियों का है, खूनी मुनि बन गया, डाकू साधु बन गया, रोगी निरोगी हो जाए, दुश्मन मित्र बन जाए ऐसा जिनशाशन हमको मिला है।
जो मिटा से आत्मा का प्रदूषण वो है पर्युषण । ग्रेट प्रभु के ग्रेट जिनशासन में विदाउट डोनेशन मिल जाता है एडमिशन, भव भव के रोगों का हो जाता है सक्सेसफुल ऑपरेशन ।
पर्युषण का असली स्वागत तब होगा जब आप वीर के संदेशों को ब्रॉडकास्ट करोगे, प्रभु के सिद्धांतों को डाउनलोड करोगे, संसार की बुरी प्रवत्तियों को डिलीट करोगे, और 12 व्रत को रिसिप्ट करोगे तब होगा प्रवचन का असली स्वागत। आप हम आपको अमीरी का पासवर्ड बताएंगे कौन कौन है जिसे अमीर बनना है अमीरी का पासवर्ड जानना है। यह एक बहुत ही गलत धारणा है की इस संसार में जो भी आया है वो खाली हाथ आया है और जो जाएगा तो भी खाली हाथ जाएगा। मकान, दुकान सब साथ में लेकर जा सकते है। लेकिन दूसरे तरीके से ।
व्यवहारिक उदाहरण से ऐसे समझ सकते है की आपके घर पर कोई मित्र या रिश्तेदार आया आपने उसकी खूब आवभगत स्वागत सत्कार किया, कुछ दिनों बाद आपका उसके घर जाना हुआ तो वो आपके साथ निश्चित ही अच्छा व्यवहार करेगा । एक ही बीमारी से ग्रस्त दो बीमार है, एक ही हॉस्पिटल में एडमिट है, डाक्टर भी वो ही है, ट्रीटमेंट सुविधाएं सब समान है लेकिन फिर भी एक मरीज अच्छा हो जाता है दूसरा मरीज शमशान पँहुच जाता है, क्यों । दो एक जैसी दुकान पास पास में है माल भी एक जैसा है फिर भी एक दुकान पर ग्राहकों की भीड़ दूसरा खाली बैठा है, क्यों । ये सब पुण्यवानी का खेल है। पैसे से खुशियां नही खरीदी जा सकती है ये आपने कितनी बार सुना होगा ये बात आप जानते तो है लेकिन मानते नही। पैसे और पावर का दुरूपयोग किया कर्मचारी को समय पर पैसे नही दिए उसकी मेहनत के पूरे पैसे नही दिया, डराया धमकाया तो पुण्यवाणी घटेगी। अमीरी का सीधा सा पासवर्ड है पैसे का सदुपयोग करो अपना पैसा दान, धर्म, सहायता में खर्च करो। मीडिया, न्यूज पेपर, पथ्थर पर नाम लिखवाने के लिये दिखावे के लिये दान मत करो, सच्चे दिल से वास्तविक जरुरतमंद को दान करो। दान करने के लिए अमीर बनने का इंतजार मत करो, साधारण भोजन का दान देने वाला नयसार महावीर बन जाता है, गरीब संगम खीर का दान देकर शालीभद्र बन गया। इतिहास में दान दाताओं की कई गाथाओं से भरा पड़ा है।
दान देने से लक्ष्मी कभी कम नही होती है। माँगने वाले आपके पास अभाव, प्रभाव व स्वभाव की वजह से आता है। रोटी कपड़े के अभाव में व्यक्ति आपके पास माँगने आता है, आपका प्रभाव है तो माँगने आता है, और आपका स्वभाव अच्छा है तो व्यक्ति माँगने आता है। लक्ष्मी की पूजा करो लेकिन लक्ष्मी का कभी भरोसा मत करो और भगवान की भले ही पूजा मत करो लेकिन भगवान पर भरोसा जरूर करो। तो याद रखियेगा अमीरी का पासवर्ड है दान और धन का सदुपयोग।