सर्व शांतिप्रदायक भक्तामर स्तोत्र अनुष्ठान में उमड़ा श्रद्धालुओं का हुजूम

मुम्बई (मेवाड़ भवन विरार) । श्रमण संघीय जैन दिवाकरिय उपप्रवर्तिनी सत्यसाधनाजी म.सा की सुशिष्या जिनशासन प्रभाविका साध्वी चारुप्रज्ञाजी म. सा आदी ठाणा-3 के सानिध्य में हुआ सर्व शांतिप्रदायक 48 दिवसीय भक्तामर स्तोत्र अनुष्ठान का शुभारंभ।
जैन धर्म में भक्तामर स्तोत्र का बहुत महत्त्व है। प्राचीन काल में आचार्य श्री मानतुंग ने इसकी चमत्कारिक रचना की थी। ऐसे प्राचीन एवं चमत्कारिक भक्तामर स्तोत्र का रविवार को प्रातः मेवाड़ भवन, विरार में सामूहिक अनुष्ठान हुआ। सैकड़ों श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप में जाप किया। श्रद्धालुओं द्वारा किए गए स्तोत्र के सामूहिक जाप से मानों पूरा वातावरण पवित्रता, आध्यात्मिकता से सराबोर हो रहा था।
भक्तामर की महत्ता बताते हुए साध्वी चारुप्रज्ञाजी म.सा ने कहा की भक्तामर स्तोत्र सर्व रोग विनाशक, सर्व सिद्धि देने वाला प्रभावी मंत्र है। इसमें 24 तीर्थंकरों में प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ की स्तुति है। सिर्फ जैन ही नहीं अपितु कितने ही अन्य श्रद्धालु भी इस प्राचीन स्तोत्र का जाप करते है। सामूहिक जाप से एक पवित्र आभावलय का निर्माण होता है। सभी को इसका प्रतिदिन सुबह के समय पाठ करना चाहिए। जाप हमारी आत्म शुद्धि के साथ–साथ कर्म निर्जरा का भी हेतु बनता है। इसका अनुष्ठान करने से परिवारों में भी शांतिमय माहौल प्रतिष्ठित हो सकेगा। अनुष्ठान के लाभार्थी- बसंतीलालजी वाघरेचा परिवार रहे। श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ (मेवाड़) विरार मुम्बई , युवक मंडल विरार के सदस्यों ने सक्रियता से दायित्व निर्वहन किया।