जनकल्यानार्थ मुनिश्री ने सुनाई महा मांगलिक, तीसरी महामांगलिक में उमड़ा जनसैलाब

महाड। परोपकार सम्राट आचार्यदेव श्रीमद्विजय ऋषभचंद्र सूरीश्वरजी म.सा.के द्वारा प्रदत्त एवं उनके सुशिष्यरत्न परम पूज्य प्रवचनदक्ष मुनिराज श्री रजतचंद्र विजयजी म.सा. के श्रीमुख से ऋद्धि सिद्धि लब्धिवंत चातुर्मास की तीसरी महामांगलिक का भव्यतम आयोजन किया गया। इस आयोजन का संपूर्ण लाभ इंदापुर के परम गुरुभक्त शा.अरविंदजी व विकेशजी कावेड़िया परिवार को प्राप्त हुआ। सर्वप्रथम श्री वासुपूज्य जिनालय महावीर भवन में विराजित गुरु भगवंतो को इंदापुर से पधारे श्रीसंघ ने सामुहिक गुरुवंदन कर मिच्छामी दुक्कड़म् किया। मंगलपाठ पश्चात श्री नवकार मंत्र एवं गौतम स्वामीजी की आरती लाभार्थी परिवार द्वारा की गई। वाजते गाजते धुमधाम से चल समारोह के साथ गुरु भगवंत व श्रद्धालु विरेश्वर मंदिर मांगलिक स्थल पहुंचे । यहां पर इंदापुर के महिला मंडल ने पंक्ति बद्व होकर व गायक निकेश बरलोटा व लिवांशी सुराणा ने संगीत सुरों के साथ गुरु भगवंत की आगवानी की। सर्वप्रथम संगीतमय गुरुवंदन किया गया। मुनिश्री ने मंगलाचरण कर आशीर्वाद दिया। कावेडिया परिवार की महिलाओं ने गीताबेन की अंगवाई में अक्षत मोतियों से गहूंली की। एक आकर्षक बृहत गहूंली भी ललिताबेन ओसवाल द्वारा बनाई गई। महिला मंडल इंदापुरने सुंदर नवकार महिमा नाटिका का मंचन किया,वहीं तुणी विशाखापट्टनम से आइ हेमां जैन ने एवं पालीताणा से चातुर्मास कर पधारे अमृतजी कावेड़िया ने सुंदर गीत गाया। दोनों सिंगर ने भी भक्ति की धूम मचाई। अजब गजब सोंग पर श्रद्धालु झूमने को मजबूर हुए। अतिथियों ने धुप दीप माल्यार्पण किया। पूज्य मुनिश्री रजतचंद्र विजयजी म.सा.ने कहा जैसे वृक्ष के मूल का महत्व है वैसे ही साधना में बीच मंत्र व स्त्रोत का महत्व है। यह मंत्र,श्रवण करने वाले को सर्व प्रकार से लाभादायी होते हैं । शारीरिक मानसिक व्यवसायिक परिवारक व धर्म अभिवृद्धि के साथ जीवन में शांति की स्थापना होती हैं। मुनिश्री ने बताया पानी अभिमंत्रित कर भी श्रद्धालु कई प्रकार के लाभ प्राप्त कर सकते है। लाभार्थी कावेडिया परिवार के उत्कृष्ट शासन के कार्य हेतु साधुवाद दिया एवं महाड़ श्रीसंघ को यशस्वी चातुर्मास कराने हेतु अनुमोदना की। मुनिश्री ने कई क्रांतिकारी विचार रखें। लाभार्थी परिवार के समस्त सदस्यों ने मुनिश्री की गुरुपूजा की। चातुर्मास समिति महाड़ एवं श्रीसंघ ने लाभार्थी कावेडिया परिवार का शानदार बहुमान किया गया। मुनिश्री रजतचंद्र विजयजी ने प्रभु की रत्नप्रतिमा कावेडिया परिवार को भेंट की। ज्ञानभंडार हेतु अलमारी व दो उपाश्रय हेतु पाट का लाभ कावेडिया परिवार ने लिया तथा प्रभु आरती व मंगल दिया किया‌। गौतम स्वामीजी की आरती शा.जयंतीलालजी हिम्मतमलजी लोणावला ने की,श्री राजेंद्र सूरीजी की आरती राजमलजी गुलाबचंदजी तलेगांव ने की, श्री ऋषभचंद्र सुरीजी की आरती शा.दीपक श्रीराम जादव ने की। आगामी चतुर्थ महामांगलिक 9 अक्टूबर रविवार को होगी। इस आयोजन में कोंकण के क्षेत्रिय श्रीसंघो का स्नेह मिलन भी किया जावेगा। 8 से 10 अक्टूबर को त्रिदिवसीय जिनेंद्र भक्ति महोत्सव धुमधाम से मनाया जावेगा। 45 आगम महापूजन का चंद्रवा- पुटिया सह महाविधान कराया जावेगा। 14 अक्टूबर को रत्न प्रतिमा युक्त श्री गौतमलब्धि महापूजन महाअनुष्ठान होगा। अपने वक्तव्य पश्चात् विशाल जन मेदिनी को मुनिश्री ने महामांगलिक पाठ सुनाया। विविध मुद्रा कराई। स्कूल के विद्यार्थियों को भी लाभ मिला।लाभार्थी कावेड़िया परिवार के समस्त रिश्तेदार मित्रगण व्यापारिक सदस्य के साथ कोंकण के अनेकों संघ ने पधारकर महामांगलिक का लाभ लिया। स्थानीय क्षेत्रीय विधायक भरतजीसेठ गोगावाले ने भी पहुंचकर आशीर्वाद लिया।कार्यक्रम पश्चात सकल श्रीसंघ का स्वामीवात्सल्य किया गया।

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