तप से काया की शुद्धि व आत्मा की सिद्धि होती है- मुनिश्री रजतचंद्र विजयजी म.सा.

महाड़ । महाड़ नगर में चल रहे यशस्वी एतिहासिक चातुर्मास के दरम्यान परोपकार सम्राट आचार्य देवेश श्रीमद्विजय ऋषभचंद्र सूरीश्वरजी म.साहेब के अंतेवासी शिष्य परम पूज्य प्रवचनदक्ष मुनिराज श्री रजतचन्द्र विजयजी म.साहेब की पावन निश्रा में मासक्षमण 30 उपवास के तपस्वी श्रीमती मंजुबेन दिलीपजी सुखलेचा का तप अनुमोदना महोत्सव धूमधाम से संपन्न हुआ। प्रातः 10:00 बजे वासुपूज्य स्वामी मंदिर से वाजते गाजते वरघोड़ा प्रारंभ हुआ जो नगर के मुख्य मार्गो से होता हुआ दशानेमा हाल में धर्मसभा में परिवर्तित हुआ। सर्वप्रथम सकल श्रीसंघ ने एवं शांताबेन मोहनलालजी सुकलेचा परिवार के विशिष्ट मेहमान सूरत दापोली उदयपुर आदि नगरों से आए थे, सभी के बीच चातुर्मास समिति के अध्यक्ष अशोकजी शाह व महावीर देसरला द्वारा गुरु वंदना की गई। मंगलाचरण पश्चात मुनिराज श्री रजतचंद्र विजयजी महाराज साहेब ने कहा भगवान महावीर जिनकी वीर धीर गंभीर वाणी से तप की प्रेरणा मिलती है,ऐसे समता के सागर प्रभु महावीर से एक जिज्ञासु ने पूछा अनेकों भव के पाप खत्म करने के लिए क्या अनेक भव लेना पड़ेंगे? भगवान ने उदाहरण के माध्यम से कहा नहीं , सैकड़ों लकड़ी के ढेर है उनको जलाने के लिए सैकड़ों माचिस की जरूरत नहीं है एक माचिस की एक तीली काफी है वैसे ही अनेकों जन्म के पापों को खत्म करने के लिए एक अंतर मुहूर्त का श्रद्धा भाव आता है तो पाप स्वाहा हो जाते हैं। मुनिश्री ने कहा तप सिर्फ काया को गलाने के लिए नहीं तप से आत्मा की शुद्धि होनी चाहिए। छल कपट मोह माया से मुक्त होना चाहिए । निसंदेह मंजूबेन ने बहुत बड़ा पराक्रम किया है। मुनिश्री के वक्तव्य को श्रद्धालु एकतान से सुन रहे थे। मुनिश्री ने मंजूबेन के कठोर तप करने का श्रेय परिवार के बड़े बुजुर्गों से मिले संस्कारों को दिया। जोधपुर से पधारे साध्वी चंदनप्रभाजी का भी स्वागत किया। अपने उद्बोधन में पद्मावती माताजी चंदन प्रभाजी ने तपस्वी का गुणगान किया कहां ऐसा महान तप करना सरल नहीं है। रसेइंद्रिय पर काबू करना बहुत कठिन है । जोधपुर के माताजी ने युवा संत मुनिराज श्री रजतचंद्र विजयजी महाराज साहेब को त्रिस्तुतिक कोहिनूर हीरा बताया वहीं उन्होंने तपस्वी मंजू बहन की बुरी बुरी प्रशंसा की । और भी अन्य कई लोगों ने तप अनुमोदना में अपनी प्रस्तुति दी। अशोक शाह दिलीप सुकलेचा ने अपने भाव प्रस्तुत किए। मुनिश्री की प्रेरणा से मंजूबेन को विजय तिलक लगाने का 8 उपवास की बोली लगाकर चढ़ावा उमेश गांधी ने लिया। सकल जैन श्रीसंघ एवं चातुर्मास समिति ने अभिनंदन पत्र देकर तपस्वीं मंजुबेन का बहुमान किया। इस मौके पर मुनि रजतचद्र व पद्मावती माताजी के समक्ष हुआ अहिंसा यात्रा के वेबसाइट का हुआ शुभारंभ।
गौ माता को राष्ट्रीय पशु घोषित करो अभियान को देश की जनता से जोड़ने के लिए अहिंसा यात्रा की वेबसाइट https://ahinsayatra.com का विमोचन जीवदया प्रेमी ज्योतिषाचार्य शासन सम्राट अचार्यश्रीमद विजय ऋषभचंद्र सुरीश्वरजी म.सा. के सुशिष्य मालवरत्न प.पू. मुनिराज श्री रजतचंद्र विजयजी म.सा. एवं माँ पद्मावती आराधिका पीठाधीश साध्वी चंदनप्रभाजी म.सा. जी के सानिध्य में महाराष्ट्र के महाड़ नगर में जैन संघ सानिध्य में हुआ। उक्त आयोजन के दोरान मासक्षमण के तपस्वी मंजुबेन सुकलेचा का समाज में उल्लासपूर्वक सम्मान किया वहीं मुनिराज ने आशीर्वचन देते हुए कहा कि यह सफलता पूर्वक कानून बन सके इसके लिए हम आशीर्वाद प्रदान करते है। कार्यक्रम के अंत में महिला द्वारा गीत गाए गए एवं लाभार्थी परिवार की ओर से स्वामीवात्सल्य किया गया।

Play sound