अपने आप को सीरियस बीमार ना समझे और ना कहें

अशोक मेहता
इंदौर (लेखक, पत्रकार, पर्यावरणविद्)

म छोटी मोटी बीमारी में भी नामचीन डॉक्टर के यहां जाते हैं वे भारी भरकम परामर्श शुल्क (Fee) लेकर आपकी जमाने भर की जांचें करवाते हैं और उसके ऊपरान्त ढेर सारी दवाइयाॅ लिख देते हैं। वह दिन भर में अनेको मरीजो को देखते हैं उनके पास आप की बीमारी की जड़ तक समझने का समय नहीं होता और वह अपनी प्रख्याती के लिए सभी मरीजों को सुबह 11:00 बजे बुला लेंगे मरीज कई घंटों तक इंतजार में बैठा रहता है और वह यह समझता हैं कि यहा कितने मरीज आते है। यह समझना नासमझी है।
कई व्यक्ति इतने फतरू होते हैं अपनी छोटी सी बीमारी को बहुत बड़ा चढ़ाकर दूसरों से कहते है साथ में यह भी कहते हैं कि डॉक्टर साहब कह रहे थे अरे यह तो मैं था कि सहन कर गया नहीं तो जाने क्या हो जाता।
ऐसे ही एक भाई से मैंने कहा कि आप अच्छा इलाज क्यों नहीं कराते तो उसने एक ब्रांडिंग डॉक्टर का नाम लेकर कहा कि 2 साल से उनका इलाज चल रहा है। अब मेरे पास मन ही मन हंसने के अलावा और इस भाई के साथ सहानुभूति के सिवाय और कोई चारा नहीं था। दो साल से इलाज नामी गरामी डॉक्टर के यहां चल रहा है और फिर भी भाई बीमार है। इन पर रोए या हसे कुछ समझ में नहीं आता।

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