सम्मेदशिखर जी। तपस्वी मौन पूर्वक सिंहनिष्कडित व्रत करने वाले विश्व के प्रथम आचार्य श्री अन्तर्मना प्रातः स्मरणीय आचार्य श्री 108 परम पूज्य प्रसन्न सागर जी महाराज। 21 जुलाई 2021 से गुरुदेव का मौन साधना प्रारंभ* हुई है जो अब 130 दिन की ओर साधना कर 28 जनवरी 2023 को समापन होगी। आचार्य श्री 496 उपवास और 61 दिन आहार ग्रहण करेंगे।
भारत गौरव साधना महोदधि अंतर्मना आचार्य 108 श्री प्रसन्न सागर जी महाराज पारसनाथ पहाड़ के स्वर्णमय स्वर्ण भद्र कूट टोंक पर विराजमान हैकिसी भी कार्य मे सफल होने के लिए पांच चीजें बहुत जरूरी है साहस,श्रम,संघर्ष ,सब्र ओर लक्ष्य …।
जीवन में कुछ बनने पाने,ओर किसी लक्ष्य तक पहुंचने के लिए संकल्प का होना बहुत जरूरी है। लक्ष्य के अभाव में साहस,श्रम, संघर्ष और सब्र निरर्थक है ।लक्ष्य निश्चित है तो मंजिल सामने है अन्यथा चलते रहो कोल्हू के बैल की तरह ।
हमारे भीतर इतना साहब हो कि हम तमाम झंझावातों के बीच भी अपने लक्ष्य के प्रति ईमानदार रहें। जीवन में कई बार हमें चुनौतियों का सामना करना पड़ता है ओर कमजोर मन वाले लोग अपने लक्ष्य को बदलते लगते हैं और सरल राह की खोज में संलग्न हो जाते हैं ।यदि मन का भटकाव हमें विचलित और कमजोर कर देता है ,फिर हमारा लक्ष्य के प्रति आस्था विश्वास कमजोर होने लगता है। हम स्वयं को थका, हारा, परास्त महसूस करने लगते हैं ।यही से मन और जीवन में विक्षोभ उत्पन्न होने लगता है
अरे बाबू एक छोटी सी चींटी भी घर से बाहर निकलती है तो वह भी अपने लक्ष्य को निर्धारित कर लेती है ।और उस लक्ष्य तक पहुंचने के लिए पूरा साहस, श्रम संघर्ष लगा देती है । लक्ष्य तक पहुंचने के लिए साहस श्रम और संघर्ष और सब्र बहुत जरूरी है। असफलताओं के तूफान के मध्य सफलताओं के ध्वज दंड को ठाम कर चलने का साहस रखने वाले ही लक्षय भेदने का गौरव प्राप्त करते हैं जैसे हमने सिद्धवरकुट में सिद्धहस्त संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी गुरुदेव से सिंह निष्क्रिय व्रत करने का संकल्प लिया और सिद्ध क्षेत्र सम्मेदशिखर जी पर्वत पर तप साधना करने का लक्ष्य बनाया तब कहीं जाकर हम आज इस मुकाम पर तक पहुंच पाए हैं अन्यथा इस जीवन में इतना महान व्रत और महान तीर्थराज पर्वत पर साधना करना निश्चित मेरे अनंत जन्मों ओर गुरुओ के आशीष का फल है। उक्त जानकारी कोडरमा मीडिया प्रभारी राज कुमार अजमेरा ,मनीष सेठी ने दी।