रतलाम। संघ स्थविर,जिनागमसेवी, युगपुरुष 83 वर्ष से दीक्षापर्यायी गच्छाधिपति आचार्य दौलतसागर सूरीश्वरजी महाराजा के 102 वे जन्मदिन के अनुमोदनार्थ गुरु पर्व उत्सव आचार्य पूर्णचन्द्रसागरसूरीजी म.सा. , पूज्य पन्यास श्री अपूर्वचन्द्र सागरजी म सा, पूज्य साध्वी श्री राजरत्नाश्रीजी म.सा.,पू साध्वी श्री शुचिप्रज्ञाश्रीजी म सा, आदि ठाणा की पावन निश्रा में आगमोद्धारक उपाश्रय सेठजी के बाजार पर मनाया गया।
पूज्य आचार्य श्री पूर्णचन्द्रसागरसूरीजी मसा ने गच्छाधिपति श्री दौलतसागरसूरीजी महाराजा के जीवन परिचय पर प्रकाश डालते हुए बताया कि आपका जन्म मेहसाणा जिले के जैतपुर गांव मे पाटीदार परिवार मे हुआ था। आपका जन्म नाम शंकर था। वर्तमान में आप 925 से अधिक साधु समुदाय के सागर गच्छ के गच्छाधिपति है। आपको जैन धर्म के 32 आगम कंठस्थ याद है। आज भी पूज्य गुरुदेव बिना चश्मे के पढ़ लेते है। आपने की जिनमंदिरो की प्राण प्रतिष्ठा की।
इस अवसर पर श्री सुधर्मास्वामीजी से गच्छाधिपति तक 75 पाट परम्पंरानुसार सामुहिक गुरु पादुका पूजन की गई। श्रमण भगवान महावीर स्वामीजी को गुरु मानकर गुरुपूजन का लाभ सुगनबाई पोरवाड़ परिवार के अशोक जैन चौटाला ने लिया व गुरु आरती का लाभ मांगीलाल वाघमार परिवार ने लिया। अभिषेक ओस्तवाल संगीत मंडल द्वारा सुमधुर भजनो की प्रस्तुति की गई।
गुरुपूजन उत्सव में 100 से अधिक पुरुष व महिलाओं ने गुरुपूजन का लाभ लिया। गुरुदेव के 102 वे जन्मदिन पर लकी ड्रा खोल कर ईनाम भी वितरित किए गए।
गुरु पर्व उत्सव का आयोजन श्री देवसुर तपागच्छ चारथुई जैन श्री संघ गुजराती उपाश्रय व श्री ऋषभदेवजी केसरीमलजी जैन श्वेताम्बर पेढी द्वारा किया गया।