नीमचौक जैन स्थानक में ‘मित्रता दिवस’ पर आयोजित हुआ प्रेरक धर्मसभा

रतलाम 2 अगस्त “आजकल की मित्रता दिखने में सुंदर तो होती है, लेकिन उसमें सच्चा समर्पण और आत्मीयता रूपी खुशबू गायब हो चुकी है। लोग कागज के फूलों जैसी बनावटी दोस्ती निभा रहे हैं।” ये विचार महासाध्वी प्रफुल्ला श्री जी म. सा. ने रविवार को नीमचौक स्थित जैन स्थानक पर ‘मित्रता दिवस’ (फ्रेंडशिप डे) के अवसर पर आयोजित विशेष धर्मसभा में व्यक्त किए।
महासाध्वी जी ने अपने प्रेरक उद्बोधन में आज के दौर में मित्रता के बदलते स्वरूप पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए दोस्तों को चार श्रेणियों में विभाजित किया: 1. थाली मित्र: जो सिर्फ खाने-खिलाने तक ही सीमित रहते हैं। 2 प्याली मित्र: जिनकी संगति केवल पीने-पिलाने और मौज-मस्ती तक सीमित होती है। 3 ताली मित्र: जो केवल आपकी प्रशंसा में तालियां बजाते हैं और प्रोत्साहन देते हैं। 4 कल्याण मित्र: जो जीवन के हर सुख-दुख में निस्वार्थ भाव से साथ खड़े रहते हैं और हमेशा सही मार्ग दिखाते हैं।
सोशल मीडिया के दौर पर प्रहार करते हुए महासाध्वी जी ने कहा कि फेसबुक और इंस्टाग्राम पर लोगों की फ्रेंड लिस्ट तो बहुत लंबी होती है, लेकिन मुसीबत के समय व्यक्ति खुद को अकेला पाता है। उन्होंने कहा, “आज युवा परिवार से ज्यादा दोस्तों को महत्व दे रहे हैं। दोस्त बनाना गलत नहीं है, लेकिन थाली, प्याली या ताली मित्रों की भीड़ बढ़ाने से कोई लाभ नहीं। दोस्त हमेशा ‘कल्याण मित्र’ ही होना चाहिए।” महासाध्वी जी ने भगवान महावीर के वचनों को उद्धृत करते हुए कहा कि प्रभु महावीर ने कहा था— “संसार के सभी जीव मेरे मित्र हैं, मेरी किसी से कोई दुश्मनी नहीं है।” दोस्ती दूध और पानी की तरह होनी चाहिए, जो एक-दूसरे में मिलकर एक हो जाते हैं। मित्रता के इतिहास में कृष्ण-सुदामा, राम-सुग्रीव और भगवान महावीर-गौतम स्वामी का संबंध ही सच्चा आदर्श है। अंत में उन्होंने श्रद्धालुओं को सीख देते हुए कहा कि यदि जीवन में सद्गुरु से दोस्ती कर लोगे, तो इस भवसागर से पार उतर जाओगे। इसलिए हमें जीवन में केवल कल्याण मित्र ही बनना चाहिए और कल्याण मित्र ही बनाना चाहिए।