जावरा (अभय सुराणा) । जगत वल्लभ जैन दिवाकर पूज्य गुरुदेव चौथमल जी म.सा. एंव श्रमण संघीय आचार्य सम्राट डाक्टर शिवमुनि जी म.सा. की आज्ञानुवर्तिनी जिनशासन चंद्रिका मालवगौरव श्री प्रियदर्शना जी महाराज साहब उपप्रवर्तिनी आयम्बिल आराधिका तपचक्रेश्वरी पूज्याश्री अरुणप्रभाजी म.सा.,तत्व चिंतिका पुज्य श्री कल्पदर्शना जी महाराज साहब शतावधानी गुरु कीर्ति जी म.सा., बाल साध्वी मधुर गायिका गुरु निधी जी म.सा. एंव नवदीक्षिता अरुणकीर्तिजी म.सा. आदि ठाणा जावरा दिवाकर भवन पर सुख साता पूर्वक विराजीत है। महासती गुरु कीर्ति जी द्वारा विशिष्ट ज्ञानवर्धक अनूठा प्रश्न मंच दिनांक 26 नवंम्बर शनिवार प्रातः 9:00 बजे दिवाकर भवन पर आयोजित किया गया। जिसमें धार्मिक व जनरल केटेगरी के आधार पर श्रावक श्राविकाओ से संक्षिप्त प्रश्न पूछ कर श्रावक श्राविका द्वारा ही लिखे गये उन समस्त 100 प्रश्नों के क्रमानुसार आगे से पीछे एवं पीछे से आगे साथ ही बीच में से क्रम पर पूछने पर उसी क्रम का उत्तर या नाम पूछने पर उसका क्रमांक भी शतावधानी महासती गुरुकीर्ति जी महाराज साहब द्वारा अपने विशेष स्मृति द्वारा उत्तर दिए। महासती जी द्वारा धर्म सभा कोअपना आशीर्वचन प्रदान किया उपरोक्त जानकारी देते हुए श्री संघ अध्यक्ष इंदरमल टुकडिया कार्यवाहक अध्यक्ष ओमप्रकाश श्रीमाल ने बताया कि तप चक्रेश्वरी अरुणप्रभा जी महाराज साहब जेन दिवाकर चोथमलजी महाराज साहब की जन्मस्थली नीमच के जीरन शहर के हैं ।आपके दीक्षा को 42 वर्ष पूर्ण हो गए हैं दीक्षा के समय से ही आप उपवास एवं आयम्बिल की अखंड तप साधना कर रहे हैं आपके तप के प्रभाव से ही आपके पैरों से केसर की वृष्टि हुई एवं हाथ पर स्वास्तिक एवं पैर में स्टार के चित्र अंकित हुए हैं, यह आपके तप का ही प्रभाव है ।आप जहां भी चातुर्मास करते हैं वहां मासक्षमण सामान्यतः अधिक होते हैं। वर्तमान आचार्य ध्यान योगी डाँ शिव मुनि जी महाराज साहब एवं युवाचार्य श्री महेंद्र जी महाराज साहब ने आपके जिनशासन की प्रभावना को देखते हुए रतलाम चातुर्मास में श्रमण संघीय उपप्रवर्तनी पद की पदवी प्रदान की। उपप्रवर्तनी पद प्राप्त होने के पश्चात प्रथम बार जावरा आगमन होने पर जावरा श्रीसंघ के समस्त पदाधिकारियों एवं महिला मंडल बहु मंडल बालिका मंडल के पदाधिकारियों द्वारा आपको श्रद्धा एवं आदर की चादर भेंट की गई। साथ ही जिन शाशनचंद्रिका महासती श्री प्रियदर्शना जी महाराज साहब का जावरा 2022 का ऐतिहासिक यशस्वी स्वर्णिम चातुर्मास की बधाई देते हुए अरुणप्रभाजी महाराज साहब में ने भी आपको आदर की चादर भेट की। धर्म सभा का संचालन महामंत्री महावीर छाजेड़ ने किया।