आत्मा में दुर्भावना पैदा होती है वह अधर्म और पाप है ऐसे का विश्व के किसी धर्म में प्रवेश नहीं है- राष्ट्र संत कमलमुनि कमलेश

जावरा जैन दिवाकर भवन 29 दिसंबर 2022 । दुर्भावना अपने आप में हमारा सबसे बड़ा खतरनाक शत्रु है अनु बम परमाणु बम से भी खतरनाक है। उक्त विचार राष्ट्र संत कमलमुनि कमलेश ने संबोधित करते कहा कि बम तो तन का ही नुकसान करते हैं परंतु दुर्भावना हमारे सद्गुणों को जलाकर खाक में मिला देती है।
उन्होंने कहा कि जिस निमित्त से आत्मा में दुर्भावना पैदा होती है वह अधर्म और पाप है ऐसे का विश्व के किसी धर्म में प्रवेश नहीं है।
मुनि कमलेश ने बताया कि आत्मा में दुर्भावना प्रवेश करने पर धार्मिक आत्मा भी शैतान और राक्षस के रूप में परिवर्तित हो जाती है।
राष्ट्रसंत ने स्पष्ट कहा कि दुर्भावना और धार्मिकता एक साथ नहीं रह सकते मानसिक और शादी की रोगों का शिकार बनता है आत्मा दुर्गति के मेहमान बनती है। जैन संत ने कहा कि खून से रंगा कपड़ा खून से साफ नहीं होता वैसे हीनिर्मल भावना के द्वारा ही दुर्भावना पर विजय प्राप्त किया जा सकता है निमाड़ सौरभ महासती रमणिक कंवर जी दमु नूतन प्रभात जी वंदना श्रीजी मीमांसा जी सभी का मधुर मिलन हुआ गौतम मुनि जी ने विचार व्यक्त किए।
अखिल भारतीय जैन दिवाकर विचार मंच दिल्ली के वरिष्ठ कार्यकर्ता अभय श्रीमाल ने बताया कि राष्ट्रसंत कमल मुनि कमलेश के सानिध्य में 31 दिसंबर प्रातः 9:00श्री जैन दिवाकर हाई सेकेंडरी स्कूल रिंगनोद वार्षिक सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है मुख्य अतिथि के रूप में विधायक राजेंद्र जी पांडे और विशेष अतिथि के रूप भाजपा के वरिष्ठ नेतामडॉ दिलीप शाकल्य दिवाकर मंच के राष्ट्रीय संगठन मंत्री अभय सुराणा जिलाध्यक्ष शेखर नाहर समारोह की उपस्थित रहेंगे। 1 जनवरी 2023 को ऐसा सम्मेलन के रूप में आयोजित किया जाएगा जैन स्थानक भवन में ।

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