शिक्षा का लक्ष्य मात्र डिग्री प्राप्त करना नहीं होता है बल्कि कर्तव्यों का बोध होना अत्यंत जरूरी है – राष्ट्रसंत कमल मुनि कमलेश

श्री जैन दिवाकर हाई सेकेंडरी स्कूल का वार्षिकोत्सव सम्पन्न

रिंगनोद (जैन दिवाकर हाई सेकेंडरी स्कूल) । जब तक शिक्षा जगत में संस्कारों का बीजारोपण और संस्कृति का ज्ञान का बोध नहीं कराया जाएगा तब तक चरित्र निर्माण असंभव है । उक्त विचार राष्ट्रसंत कमल मुनि कमलेश ने जैन दिवाकर हाई सेकंडरी विद्यालय में संबोधित करते कहा कि शिक्षा का लक्ष्य मात्र डिग्री प्राप्त करना नहीं होता है बल्कि कर्तव्यों का बोध होना अत्यंत जरूरी है । उन्होंने कहा कि अक्षर ज्ञान के साथ अनुभव विवेक का ज्ञान समावेश किया जाए तो वरदान बन सकता है।
मुनि कमलेश ने बताया कि आध्यात्मिक शिक्षा के सैनिक तैयार करके पाश्चात्य संस्कृति के हमले को रोकना समय की सबसे बड़ी मांग है । राष्ट्रसंत ने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए सभी बुराइयों और बीमारियों से बचेंगे मानवता नहीं बचेगी तो मंदिर मस्जिद के ताले कौन खोलेगा । जैन संत ने स्पष्ट कहा कि वर्तमान में धर्म स्थलों के साथ-साथ शिक्षा जीव दया और चिकित्सा मंदिर होनी चाहिए एक जीवंत आत्मा की सेवा करना पांच मंदिर बनाने से बड़ा लाभ है।
विद्यालय के वार्षिक उत्सव मंच के वरिष्ठ कार्यकर्ता स्कूल के संस्थापक श्री अभय श्रीमाली ने आयोजित किया । राष्ट्रीय संगठन मंत्री अभय सुराणा गो कथा वाचक पंडित जी मूर्तिपूजक महा सती जी ने उद्बोधन दिया प्रतिभाशाली बच्चों को सम्मानित किया गया दीक्षार्थी बहन का अभिनंदन किया जिसकी 26 और 27 जनवरी को रिंगनोद में दीक्षा होने जा रही है श्री संजय मुनि कमलेश से विनती की ।

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