




दहाणु । परोपकार सम्राट आचार्यदेव श्रीमद्विजय ऋषभचंद्र सूरीश्वरजी म.सा.के आज्ञानुवर्ति सुशिष्य प्रवचनदक्ष मुनिप्रवर श्री रजतचंद्र विजयजी म.सा.की प्रभावशाली शुभ निश्रा में 2 दिवसीय गुरुसप्तमी महोत्सव धुमधाम से सानंद संपन्न हुआ।
28 दिसंबर को प्रातः स्नात्र एवं अष्टप्रकारी पूजन से शुभ शुरुआत की गई। दोप.में मुनिप्रवर श्री का सामैला के साथ भव्य मंगल प्रवेश किया गया। प्रभु दर्शन,गुरु दर्शन के पश्चात वरघोड़ा धर्मसभा में परिवर्तित हुआ। जहां पर मुनिप्रवर ने गुरु तत्व पर प्रभावशाली विवेचना की, प्रभु पथदर्शक है गुरु, प्रभु प्रकाश (ज्ञान ) दर्शक है गुरु, आत्मा स्वरुप दर्शक है गुरु। गुरु से प्रभु व धर्म की प्राप्ति होती है। धर्मसभा में मुंबई,भिवंडी,ठाणा,कोंकण क्षेत्र राल पट्टी के संघों का आगमन प्रारंभ हो गया। सम्पूर्ण गुरुधाम तीर्थ दुल्हन की तरह सजाया गया। प्रभु व गुरु दरबार में मुंबई के कलाकारों ने मनोरम्य सजावट की। विशाल भोजन मंडप, आयंबिल तप हॉल, आराम खंड व धर्मसभा भवन सभी अतिथि महेमानों के लिए तैयार थे। दिनभर धार्मिक उत्सव के साथ संध्या को तीर्थ पर प्रथम बार शुभ मुहूर्त में चढ़ावे की जाजम को बिछाया गया। जिसका लाभ श्रीमति सीताबेन पीरचन्दजी नरता (भीनमाल) को मिला। प्रथम अभिषेक का शुभ चढ़ावा महोत्सव लाभार्थी धीरजमलजी वालचन्दजी परमार संजान को मिला । प्रभु व गुरु के मुनिम बनने का लाभ रमेशजी ओटरमलजी बागरा को मिला। विविध बोलिया की गई। भिवंडी से महेंद्र जैन, हैदराबाद से कार्तिक, इंदौर से ऋषभ मेहता एवं नागदा से योगेश ने भक्ति की धुम मचाई व हितेश राजावत ने भी भक्ति गीतों से लोगों को झुमाया। देर रात तक भक्ति भावना कार्यक्रम चलता रहा। दूर दराज के गुरुभक्तों हेतु ठहरने की सुन्दर व्यवस्था की गई। गुरु के दरबार को निहारने के बाद लोगों ने कहा हम मालवा के मोहनखेड़ा जैसा ही इस महाराष्ट्र के मोहनखेड़ा में महसूस कर रहे हैं। दहाणु रोड दहाणुगांव सावटा बोईसर घोलवड़ बोर्डि संजान उमरगांव के सेकंडों युवाओं ने तन मन समर्पण से सेवा दी,जिनकी मोहनखेड़ा गुरुधाम ट्रस्ट मंडल ने तहेदिल से स्वागत कर अनुमोदना की। पौष सुदि सातम की प्रातः सुबह प्रभु एवं गुरु मंदिर के पट उद्घाघाटन का कार्यक्रम हुआ जिसका लाभ रमेशजी बागरा वालो ने लिया। प्रात 9 बजे से गुरुदेव के महाभिषेक प्रारंभ किये गये। उसके साथ ही धर्मसभा मुनिप्रवर के मंगलाचरण से प्रारंभ हुई वार्षिक चढ़ावे एवं अन्य चढ़ावे किये गये। उमरगांव क्षेत्र के विधायक रमणलालजी पारकर विशेष अतिथि के रूप में पधारे।दादा गुरु के दर्शन पश्चात श्री रजतचंद्र विजयजी से आशीर्वाद लिया। मुनिश्री ने सार गंभीत उद्बोधन दिया,पाटकरजी ने भी उद्बोधन दिया। ट्रस्ट मंडल एवं प्रकाश जी कानुंगा व धिरजमलजी एवं नरेशजी परमार ने अतिथि का स्वागत किया। भक्तों की भारी भीड़ चारों और जमी हुई थी। गुरुधाम तीर्थ भूमि पर सर्वप्रथम बार गुरु सप्तमी का भव्य वरघोड़ा रथयात्रा की शुभ शुरुआत की गई जिसमें गुरुप्रतिमा लेकर गुरुभक्त बैठे हुए थे। भारी संख्या में श्रद्धालुओं का जमावाड़ा था। रथयात्रा के समय इतनी भीड़ हो गई की ट्राफिक जाम हो गया।
दोप.में धर्मसभा की गई जिसमें श्री शंखेश्वर पुरम् तीर्थ बदनावर के कैलेंडर पंचांग का विमोचन लाभार्थी, ट्रस्ट मंडल व अतिथि द्वारा किया गया। लाभार्थी परिवार ने चांदी का छत्र व सोने की चैन एवं रीना हितेशजी राजावत घोलवड़ ने अपने जन्मदिन निमिते स्वर्ण चैन गुरुमंदिर में अर्पण की। दहाणु गांव के जोशिले कार्यकर्ता राकेशजी पुनमिया को गुरुधाम का ट्रस्टी नियुक्त किया गया। पुरी खचाखच भरी सभा में बधाई दी व अनुमोदना की। ट्रस्टी पद की उद्घोषणा श्री रजतचंद्र विजयजी ने की। ट्रस्टी बनाते ही राकेश भाई ने आगामी गुरु सप्तमी त्रिदिवसीय महोत्सव का लाभ लेकर तीर्थ विकास की मिशाल समाज को दी। ट्रस्ट मंडल ने लाभार्थी परमार परिवार का एवं पधारे अतिथि श्रवणजी जैन, संजु जैन, इंदापुर के मनोजजी नाडावत, विकेशजी कावेडिया, जांवतराजजी बोराणा भिवंडी का बहुमान किया।
इस मौके पर लाभार्थी परिवार ने नई धर्मशाला में एक रूम का लाभ लिया। भीनमाल के मंजू बहन ने एक रूम का लाभ लिया। कई गुरु भक्तों ने 100 ग्राम चांदी एवं 200 ग्राम चांदी में लाभ लिया। कई गुरु भक्तों ने 11000 की भोजनशाला की कायमी तिथि मे लाभ लिया।
गुरु सप्तमी की आरती का लाभ 32 हजार मन में भीनमाल के संजयजी सेठ परिवार को प्राप्त हुआ। गुरुसप्तमी महोत्सव को सफल बनाने में श्री मोहनखेड़ा गुरुधाम तीर्थ दहाणु के ट्रस्टी श्री नथमलजी भंडारी,श्री भरतजी एवं श्री भुपेशजी रिकबचंदजी सोलंकी,श्री उत्तमचंदजी बाफना,श्री संजयजी वाणीगोता, श्री संजयजी सेठ,श्री मुकेशजी मेहता,श्री मीठालालजी भंडारी,श्री रमेशजी चंदन,श्री ललितजी पुनमिया,श्री हितेशजी राजावत,श्री महिपालजी परमार श्री राकेशजी पुनमिया दहाणुगांव का विशेष सहयोग रहा।