आज का दिन माता बादाम बाई ओर पिता श्रीजीवराज जीके लिए बड़ा ही सौभाग्य का दिन था आज किसी दिव्य बालक का जन्म होने वाला था जो जिनशासन के गौरव को बढ़ाने वाला था माता बादाम बाई ने सोचा भी न था की वह एक ऐसे दिव्य बालक को जन्म देने वाली है जो आगे जाकर जिनशासन के गौरव को बढ़ाएगा धन्य है वह मां जिन्होंने जिन शासन को यह अनमोल रत्न दिया धन्य है पिता जीवराज जी जो ऐसे रत्नों को जैन समाज को दिया धन्य था 16 दिसंबर 1985 का दिन जिस दिन बालक जितेंद्र ने जन्म लिया बालक बचपन से ही चंचल स्वभाव और विवेक और ज्ञान से परिपूर्ण था आपका स्वभाव बड़ा ही निर्मल और मनमोह वाला था ।
दीक्षा के पूर्व किशोर जितेंद्र को 12 आगम का का कंठस्थ ज्ञान, 32 आगम का अध्ययन, हिंदी संस्कृत के कुशल अनुवादक, मर्मस्पर्शी कहानियां, कुशल निबंधकार , कुशल व्यंग्यकार, शायराना अंदाज में बात करना, भक्ति रस हास्य रस वीर रस के कवि, भाषा का अध्ययन था आदि।
दिनांक 29 जनवरी 2001 में आचार्य प्रवर सुदर्शन मुनि जी महाराज के सानिध्य में जितेंद्र ने दीक्षा ली जिनका नाम भव्य दर्शन मुनि जी महाराज के नाम से रखा गया आप भाषा विद जानकार संयमी मधुर भाषा के धनी है आपका स्वभाव आपका चिंतन आपका व्यक्तित्व अत्यंत ही प्रभावशाली है आप जब प्रवचन देते हैं तब मन मोह लेते हैं आपके प्रवचन से कई लोगों के जीवन में कई बदलाव आए हैं आज आपका दीक्षा दिवस है आपको वैराग्य काल में 22 वर्ष पूर्ण हो चुके हैं गुरुदेव भव्य दर्शन मुनि जी महाराज साहब आप इसी तरह वर्षों वर्षों तक ज्ञान की गंगा पूरे राष्ट्र में पूरे समाज में फैलाएं और इस दीक्षा जयंती पर प्राज्ञ दिवाकर मैत्री मंच आपकी सुख साता पूछते हुए आपके दीक्षा काल के जीवन में जो उतार-चढ़ाव आए हैं उनकी सुख साता पूछता है और कामना करता है कि आप इसी तरह वर्षों वर्षों तक जिनवाणी का लाभ हमें देते रहे प्राज्ञ दिवाकर मंच की ओर से आपको बारंबार अनुमोदना ।
दीपक श्रीमाल
डॉ. रोहित पंजाबी