शिव हमारी आत्मा है:आचार्य श्री कश्यप

रतलाम। आज शुक्रवार को महाशिवरात्रि के पावन अवसर एवं स्वर्गीय श्री चिंतामण जी बहादर की स्मृति में टेकेश्वर महादेव के पावन प्रांगण में शिव महापुराण के चौथे दिन पर आचार्य श्री कश्यप जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि शिव ही हमारी आत्मा है शिव के रहते सास आ रही है जा रही है आँख देख रही है कान श्रवण कर रहे हैं हाथ सेवा कर रहे हैं पाव चल रहे हैं जिव्हा स्वाद (रस) ले रही है जब तक शिव है सम्पूर्ण इन्द्रियों में कार्य करने की शक्ति है लेकिन एक शिव के अदृश्य होते ही सारी इन्द्रिय कार्य करना बंद कर देती है तब इस शिव विहीन शरीर को शव कहा जाता है इसलिए मनुष्य को चाहिए कि जब तक शिव हमारे साथ है तब तक हमे अपने कल्याणकारी मार्ग का चयन करना चाहिए और कल्याणकारी मार्ग शिव कथा में आने से प्राप्त होता है शिव कथा संसार में रहने की कला सिखाती है और संसार से मुक्त होना सिखाती है ।
व्यासपीठ का पूजन एवं आरती आचार्य पंडित देव जी ने मांगीलाल ममता बहादर एवं टेकेश्वर महादेव भक्त मंडल द्वारा करवाया ।
शनिवार को शिव कथा 12 बजे प्रारंभ होगी कथा में शिव पार्वती विवाह मनाया जाएगा प्रतिवर्ष अनुसार 4 बजे से टेकेश्वर महादेव का पालकी बग्गी घोडे बेंडबाजे ढोल नगाड़े से नगर भ्रमण शहर के प्रमुख मार्गो से किया जाएगा ।

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