श्रमण संघ के प्रमुख मंत्री पूज्य श्री शिरीषमुनि जी महाराज 19 फरवरी को अपने जन्म दिवस के 59 वर्ष पूर्ण कर 60 वे वर्ष में प्रवेश कर रहे हैं । इस पावन अवसर पर आपका संक्षिप्त जीवन परिचय

सुरेन्द्र मारू इंदौर

19 फरवरी 1964 को राजस्थान प्रांत के उदयपुर (मेवाड़) के समीप नाई ग्राम में धर्मनिष्ठ श्रावक श्री ख्यालीलालजी कोठारी के घर आंगन एवं श्राविका श्रीमति सोहनबाई कोठारी की रत्न कुक्षि से बालक अशोक का जन्म हुआ।जन्म से धार्मिक माहौल परिवार में मिला। अपनी शिक्षा पूर्ण कर इस बालक ने कुछ बड़ा करने की सोच के साथ बंबई शहर में कदम रखे। और व्यवसायिक क्षेत्र में पदार्पण किया। लेकिन समय बड़ा बलवान होता है, वहां भी आप धर्म से जुड़े रहे। और खार, मुंबई में आचार्य सम्राट ध्यानयोगी डॉ. शिव मुनि जी महाराज साहब के संपर्क और सानिध्य में आए। शिवाचार्य जी के व्यक्तित्व से प्रभावित होकर आप संयम पथ के मार्ग पर चल पड़े। फलस्वरूप इसकी परिणीति 17 मई 1990 को यादगिर नगर (कर्नाटक )में आपकी दीक्षा सम्पन्न हुई और श्री अशोक अब पूज्य श्री शिरीष मुनि के नाम से पहचाने जाने लगे।
आचार्य सम्राट ध्यान योगी डॉ पूज्य श्री शिव मुनि जी महाराज साहब की ध्यान साधना से प्रेरित होकर पूज्य श्री शिरीष मुनि जी महाराज ने भी ध्यान को जीवन का अभिन्न अंग बना लिया। आप स्व की आत्मा के कल्याण के साथ – साथ हर इच्छुक आत्मा का कल्याण हो इस हेतु ध्यान शिविरों के माध्यम से आत्मज्ञान करवा कर कल्याण मार्ग पर बढ़ने के लिए अपनी मधुर वाणी से सभी को आकर्षित कर जन- जन के प्रेरणा स्त्रोत बन गए। ध्यान साधना के प्रति आपका समर्पण देखते ही बनता है। सागर के समान गंभीर व शांत उत्कृष्ट जीवनध्यानी मुनि प्रवर भगवान महावीर के संदेशों को जन – जन तक पहुंचाने का प्रबल पुरुषार्थ कर रहे हैं।
जीवन के प्रति आपका दृष्टिकोण – हम जैसा देखना चाहेंगे जीवन वैसा ही दिखाई देगा, अतः दृष्टि बदलिए दृश्य ही बदल जाएगा , जीवन तो संपूर्णता का पर्याय है जो हर पल, हर क्षण हमारे मनोभावों को पूर्ण करने में समर्थ है, लेकिन इसे देखने के लिए सामर्थ्यवान आंखों का होना भी नितांत आवश्यक है। आपका जीवन एक खुली किताब की तरह है, सरलता और सहजता आपके स्वभाव में है।
अपनी कला व नेतृत्व कौशल से आप श्रमण संघ के प्रमुख मंत्री के पद को शोभित कर रहे हैं। और अपने उत्तरदायित्वों का सफलता पूर्वक निर्वहन भी कर रहे हैं। आप जैसे संत धर्म व जिनशासन की प्रभावना करते हुए शोभा में अभिवृद्धि ही कर रहे है। यह श्रमण संघ एवम जैन समाज के लिए गर्व व गौरव का विषय है।
जीवन के 60 वे जन्म दिवस प्रवेश पर हार्दिक, बधाई शुभकामनाएं , सादर वंदन, नमन, अभिनंदन। संयम पथ पर ध्यान साधना के साथ आप अग्रसर रहे और आपका आशीर्वाद संघ समाज और परिवार को सदैव मिलता रहे।
इन्हीं शुभकामनाओं के साथ

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