राजधानी दिल्ली के प्रगति मैदान में विश्व पुस्तक मेला 2023 में श्री ऑल इंडिया स्थानकवासी जैन कान्फ्रेंस के स्टाल पर जैन जगत के महान संतो में से एक महान संत श्रमण संघ ऐकता के अग्रदूत जैन दिवाकर जगत वल्लभ प्रसिद्ध वक्ता पूज्य गुरुदेव श्री चौथमलजी महाराज सा. के अनमोल साहित्य, ग्रंथ, भजन संग्रह तथा निग्रंथ प्रवचन का प्रदर्शन

लेखक : सुरेन्द्र मारू इंदौर
प्राचीनकाल से ही मानव के विकास में पुस्तकों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। पुस्तकें आरम्भ से ही तथ्यों, सूचनाओं और नए विचारों का स्त्रोत रही हैं।
कहा जाता है कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती है।हम आजीवन कुछ न कुछ सीखते रहते हैं और पुस्तक इसमें हमारी सबसे अच्छी और सच्ची मित्र होती हैं।किताबों का नियमित अध्ययन हमारी एकाग्रता/याददाश्त/रचनात्मकता सोचने और समझने की शक्ति को सुदृढ़ करता है, जो जीवन में सफलता के अन्य द्वार खोलता है। पुस्तकों द्वारा ही महापुरुषों/विद्वानों के विचार अमर हो जाते हैं। उनका ज्ञान, उपदेश सदैव जीवित रहता है। जीवन में किताबों की महत्वता को बढ़ावा देने के लिए 1995 से प्रतिवर्ष 23 अप्रैल को विश्व पुस्तक दिवस मनाया जाता है।
विश्व पुस्तक मेला 2023 की थीम आजादी का अमृत महोत्सव है। लेकिन 2 साल बाद लगे पुस्तक मेले में लोगों का भरपूर प्यार मिल रहा है। राजधानी में 25 फरवरी को शुरू हुए पुस्तक मेले में पुस्तक प्रेमी बढ़ चढ़कर पहुंच रहे हैं. इस दौरान वह अपने पसंदीदा किताबों/ लेखकों से भी रूबरू हो रहे हैं।अब यह मेला अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है जो 5 मार्च को खत्म हो जाएगा।प्रगति मैदान में आयोजित मेले में लोग सुबह 11 बजे से रात 8 बजे तक एंट्री ले सकते हैं।
विश्व पुस्तक मेला 2023 की एक विशेषता यह भी है कि यहां धर्म अध्यात्म से जुड़े विषयों को लेकर अनेक धर्मों के अपने अनमोल प्राचीन साहित्य के प्रदर्शन हेतु स्टॉल लगाए गए है। इसी कड़ी में श्री ऑल इण्डिया स्थानकवासी जैन कान्फ्रेंस के अंतर्गत श्रुत संवर्धन समिति* के द्वारा *स्थानकवासी परंपराओं के महान आचार्यों ,गुरु भगवंतो, विद्वान संत- सतियों के साहित्य के प्रदर्शन का प्रथम प्रयास किया गया है और प्रथम प्रयास की प्रेरणा इतना उत्साहित कर रही है कि प्रतिवर्ष इस तरह के साहित्यिक प्रदर्शनी में सहभागी होने की धारणा बन रही है। यहां इनका उद्देश्य व्यवसाय नहीं है, वरन जैन धर्म को जन-जन तक अनमोल साहित्य के माध्यम से विश्वव्यापी स्तर तक जैन और जैनेतर तक पहुंचाना ही है।
इस हेतु श्रुत संवर्धन समिति के चेयरमैन श्री रमेश जी भंडारी, संयोजक डॉ.श्री अमित राय जी जैन, एवम अखिल भारतीय श्री भगवान जैन दिवाकर अहिंसा सेवा संघ ट्रस्ट के कार्याध्यक्ष श्री वीरेन्द्र सिंहजी धाकड़ एवं प्रेरक श्री अभय कुमारजी पोखरना आप सभी के दिली सहयोग से दिल्ली में आयोजित *विश्व पुस्तक मेला 2023 के स्टॉल में महान आचार्यों और संतों के अनमोल ग्रंथ एवम कृतियों को देखा और पढ़ा जा सकता है*। ऐसे ही महान संतों में से एक *श्रमण संघ के निर्माण में प्रमुख भूमिका रखने वाले जन – जन की आस्था के केंद्र जैन धर्म को झोंपड़ी से महलों तक रंक से राजा तक जैन धर्म को जन – जन का धर्म बनाकर उपदेशों के माध्यम से पशु बलि ,वैश्यावृत्ति को रोकने वाले “”जैन दिवाकर,जगत वल्लभ, प्रसिद्ध वक्ता पूज्य गुरुदेव श्री चौथमल जी महाराज साहब के प्रवचनों का संकलन व उनके द्वारा रचित काव्य, भजन निग्रंथ प्रवचन आदि साहित्य ग्रंथ को भी गरिमामय स्थान दिया गया है। जैन साहित्य बहुत विशाल है। अधिकांश में धार्मिक साहित्य ही है। संस्कृत, प्राकृत और अपभ्रंश भाषाओं में यह साहित्य लिखा गया तथा हिंदी में अनुवाद किया गया है। *भगवान महावीर स्वामी की प्रवृत्तियों का केंद्र मगध रहा है,इसलिये उन्होंने वहाँ की लोकभाषा अर्धमागधी में अपना उपदेश दिया जो उपलब्ध जैन आगमों में सुरक्षित है।
*📙आदिकालीन साहित्य में जैन साहित्य के ग्रन्थ सर्वाधिक संख्या में और सबसे प्रमाणिक रूप में मिलते हैं। जैन रचनाकारों ने पुराण काव्य, चरित काव्य, कथा काव्य, रास काव्य आदि विविध प्रकार के ग्रंथ रचे। इन्होंने प्रचलित लोक कथाओं को भी अपनी रचनाओं का विषय बनाया और परंपरा से अलग उसकी परिणति अपने मतानुसार दिखाई।
आगम ग्रन्थ काफी प्राचीन है, तथा जो स्थान वैदिक साहित्य क्षेत्र में वेद का और बौद्ध साहित्य में त्रिपिटक का है, वही स्थान जैन साहित्य में आगमों का है। आगम ग्रन्थों में महावीर स्वामी के उपदेशों तथा जैन संस्कृति से सम्बन्ध रखने वाली अनेक कथा-कहानियों का संकलन तथा जीवन उपयोगी सूत्र और बहुत कुछ है।
आचारांग, सूयगडं, उत्तराध्ययन सूूत्र, दसवैकालिक आदि ग्रन्थों में जो जैन श्रमण के आचार-चर्या का विस्तृत वर्णन है। और डॉ. विण्टरनीज आदि के कथानानुसार वह श्रमण-काव्य (Ascetic poetry) का प्रतीक है।