




दहाणुगांव। परोपकार सम्राट मोहनखेड़ा महातीर्थ विकास प्रेरक आचार्यदेव श्रीमद्विजय ऋषभचंद्र सूरीश्वरजी महाराजा साहेब के आज्ञानुवर्ति सुशिष्य मुनिप्रवर श्री रजतचंद्र विजयजी म.सा.की पावन निश्रा में श्री महावीर जन्म कल्याणक रथ यात्रा महोत्सव धुमधाम से संपन्न हुआ। श्री चंद्रप्रभु जैन देरासर दहाणुगांव से वरघोड़ा जुलूस प्रारंभ हुआ,नगर के मुख्य मार्गों से घुमते हुए पुनः देरासर पहुंचा। चांदी की पालकी में वीर प्रभु की आकर्षण पंच धातु की प्रतिमा शोभाजमान थी। श्रीसंघ के नवयुवक साथी पूजन के वस्त्रों में पादुका रहित थे एवं प्रभुजी को अपने कंधों पर लेकर चल रहे थे, मानो देवतागण तीर्थंकर को लेकर चलते हो। मंदिरजी पहुंचकर प्रभुजी का पोखना वधामणा किया गया,जिसका लाभ एवं वीर प्रभु के जन्मकल्याणक आरती का लाभ श्री राकेशजी पुनमिया गुरुभक्त को प्राप्त हुआ। धर्मसभा में सकल श्रीसंघ ने सामुहिक गुरुवंदन किया। मुनिराजश्री रजतचंद्र विजयजी ने धर्मसभा को मंगलाचरण के साथ प्रारंभ किया सुंदर गीत एवं प्रभु जयकारों के साथ मुनिश्री ने कहा महावीर को मानते हो उतना ही महावीर की बात (उपदेश) मानने लगों,साधक बन जाओगे। वीर प्रभु के जीवन से 3 बातों को अंगीकार करें आपके जीवन का अंधकार दूर हो जायेगा। पहला सोना कम,दुसरा खाना कम, तीसरा बोलना कम। ये तीनों कार्य घर परिवार के सुखी होने का आधार एवं आध्यात्मिक आलंवन भी है। मुनिश्री ने वीरप्रभु की समता करुणा प्रेम आदि का वर्णन किया। चंडकोषिश सर्प ने डंक मारा प्रभु वीर ने घुस्सा नहीं किया वे रुके उसे क्षमादान दिया । किसी ने पांव में खीर पकाई,किसी ने सर्दी में पानी का उपसर्ग किया, किसी ने कुछ..अर्थात देव दानव मानव सभी ने कोई कसर नहीं छोड़ी वीर प्रभु को कष्ट देने में किंतु फिर भी प्रभु मन वचन काया के निग्रह में रहकर समता पूर्वक सब सहकर आदर्श एवं पूज्यनिक बन गये। कभी आप भी किसी पर घुस्सा करते रुककर देखना मानव जीवन का आनंद मिल जायेगा। देखना साधना सफल बन जायेगी। जीवन अमृत होके ही रहेगा। मुनिश्री के ओजस्वी प्रवचनों से धर्मसभा प्रभावित हुई। स्वामीवात्सल्य के लाभार्थी श्रीमती कांताबेन जवरीलालजी का श्रीसंघ द्वारा बहुमान किया गया। श्री चंद्रकुशल महिला मंडल ने महावीर पंचकल्याणक पूजा पढ़ाई। कार्यक्रम पश्चात श्रीसंघ का स्वामीवात्सल्य किया गया। प्रकाशजी कर्नावट काका की ओर से नवपद औलीजी का अनुपम लाभ लिया गया। दहाणुगांव श्रीसंघ ने मुनिश्री को ज्यादा से ज्यादा प्रवचन लाभ की विनंती की।