भगवान आदिनाथ हमारे प्रेरणा के स्रोत, सीखे जीवन जीने की कला- समकितमुनिजी

  • वर्षीतप की साधना पर पूज्य समकितमुनिजी म.सा. का अभिनंदन
  • तप अनुमोदना सप्ताह के तहत भगवान आदिनाथ की कथा का शुभारंभ

नासिक 18 अप्रेल (निलेश कांठेड़)। हमारे परम पूज्य प्रथम तीर्थंकर श्री आदिनाथ भगवान का जीवन हमारे लिए प्रेरणा का अहम स्रोत है। उनके जीवन से हम सीख सकते है जैनत्व क्या है। सृष्टि में आए और जीवन जी रहे है ये पर्याप्त नहीं है हम किस तरह जीवन जीना चाहिए ताकि मुक्ति का मार्ग मिले इसके लिए जीवन जीने की कला सीखनी होगी। जीवन जीने की ये कला भगवान आदिनाथ के जीवन से ग्रहण कर सकते है। समकित की यात्रा भी इसी कला को सीखने के लिए प्रेरणा प्रदान करती है। ये विचार श्रमणसंघीय सलाहकार सुमतिप्रकाशजी म.सा. के सुशिष्य आगमज्ञाता, प्रज्ञामहर्षि, वाणी के जादूगर डॉ. समकितमुनिजी म.सा. ने मंगलवार को नासिक के आरके स्थानक में तप अनुमोदना सप्ताह के तहत भगवान आदिनाथ कथा का शुभारंभ होने के अवसर पर व्यक्त किए। उन्होंने महान तपसाधना करने वाले भगवान आदिनाथ के जीवन से जुड़े प्रसंग सुनाते हुए कहा कि हम किसी कारण से तपस्या नहीं कर सकते तो कोई बात नहीं लेकिन तपस्वी की अनुमोदना करके भी पुण्यों का अर्जन कर सकते है। किसी की आत्म साधना की प्रेरणा व निमित बन सके तो भी हमारा जीवन सफल होगा। भगवान आदिनाथ के जीवन के बारे में जैन धर्म के प्रति आस्थावान हर श्रावक-श्राविका को जानकारी होनी चाहिए। तपसाधना से भरपूर उनका जीवन हमे जैन दर्शन की महानता व गहनता से परिचित कराता है। तीर्थंकरों की साधना कभी निष्फल नहीं होती है। कर्म निष्फल हो सकते लेकिन धर्म नहीं। धर्मसभा में पूज्य उप प्रवर्तक श्री प्रमोदमुनिजी म.सा. के साथ प्रेरणाकुशल भवान्त मुनिजी म.सा., गायनकुशल जयवंत मुनिजी म.सा. का भी सानिध्य प्राप्त हुआ। इस अवसर पर निरन्तर लंबी विहार यात्रा के बावजूद वर्षीतप की महान तप साधना कर रहे आगममर्मज्ञ डॉ. समकितमुनिजी म.सा. का नासिक संघ के वरिष्ठ श्रावकों द्वारा अभिनंदन करते हुए सम्मान पत्र समर्पित किया गया। अभिनंदन के लाभार्थी सज्जनबाई सुभाषजी छाजेड़ परिवार रहे। अभिनंदन के अवसर पर प्रवचन हॉल हर्ष-हर्ष, जय-जय के उद्घोष से गूंजायमान हो उठा। श्रावक-श्राविकाओं ने पूज्य मुनिश्री की तप साधना की हार्दिक अनुमोदना की। पूज्य समकितमुनिजी म.सा. के मुखारबिंद से भगवान आदिनाथ की कथा का वाचन 23 अप्रेल तक प्रतिदिन सुबह 9 से 10 बजे तक होगा। समकितमुनिजी के सानिध्य में 23 अप्रेल को अक्षय तृतीया वर्षीतप पारणोत्सव का आयोजन होगा। पूज्य समकितमुनिजी का वर्ष 2023 का चातुर्मास पूना के आदिनाथ जैन स्थानक भवन के लिए घोषित है जहां चातुर्मासिक मंगल प्रवेश 25 जून को होगा।
तीन दिवसीय वर्षीतप पाराणा महोत्सव 21 से
श्री जैन श्वेताम्बर स्थानकवासी श्रीसंघ आरके नासिक के तत्वावधान में आगममर्मज्ञ पूज्य समकितमुनिजी म.सा. एवं उप प्रवर्तक श्री प्रमोदमुनिजी म.सा. के सानिध्य में तीन दिवसीय वर्षीतप पारणा महोत्सव का आयोजन 21 अप्रेल से होगा। तीनों दिन सुबह नियमित प्रवचन के साथ 21 अप्रेल को दोपहर 2 से 4 बजे तक वर्षीतप तपस्यार्थी अनुमोदन कार्यक्रम होगा। इसी दिन शाम 7 बजे से भक्ति संध्या एवं तपस्वी सम्मान कार्यक्रम होगा। तीन दिवसीय आयोजन के दूसरे दिन 22 अप्रेल को दोपहर 2 से 4 बजे तक वर्षीतप तपस्यार्थी अनुमोदन कार्यक्रम एवं शाम 7 बजे से भक्ति संध्या एवं तपस्वी सम्मान का आयोजन होगा। अक्षय तृतीया के अवसर पर 23 अप्रेल को सुबह 7 से 8.15 बजे तक वर्षीतप तपस्वी वरघोड़ा निकाला जाएगा। सुबह 8.15 से 11 बजे तक प्रवचन के बाद सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक वर्षीतप तपस्वी पारणा महोत्सव का आयोजन होगा।

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