नातन संस्कृति के संरक्षण एवं सिंहस्थ-2028 की तैयारियों को लेकर संतों का मंथन


रतलाम/सैलाना 4 जुलाई। 17 जून को सम्पन्न हुए बृहद पट्टाभिषेक के उपरांत केदारेश्वर रोड़ , पंचमुखी हनुमान मंदिर आश्रम पीठाधीश्वर परम पूज्य महामंडलेश्वर श्रीश्री 1008 आनंद गिरि जी महाराज के सान्निध्य में वैदिक सनातन संस्कृति के संरक्षण, संवर्धन एवं सामाजिक जागरण को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।
बैठक में विशेष रूप से श्रृंगेरी मठ के परम पूज्य दंडी स्वामी आत्मानंद जी सरस्वती, पूज्य योगी योगेश नाथ जी महाराज (जेठाना ), पूज्य गुरुदेव शिवानन्द जी सरस्वती ( सुजापुर ), वैदिक जाग्रति पीठ के महर्षि संजय चैतन्य ब्रह्मचारी , आचार्य जितेन्द्र नागर सहित अनेक संतजन एवं धर्मप्रेमी उपस्थित रहे।
बैठक में वर्ष 2028 में महाकाल की नगरी उज्जैन में आयोजित होने वाले सिंहस्थ महापर्व की व्यवस्थाओं पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। संतों के आवागमन, आवास, सामूहिक पंडाल की स्थापना, श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक सुविधाओं तथा समन्वित व्यवस्थाओं की रूपरेखा पर चर्चा की गई। साथ ही वर्षा ऋतु के दौरान पर्यावरण संरक्षण एवं व्यापक वृक्षारोपण अभियान चलाकर समाज को जागरूक करने का भी निर्णय लिया गया।
बैठक को संबोधित करते हुए महामंडलेश्वर श्रीश्री 1008 आनंद गिरि जी महाराज ने कहा कि रतलाम, मंदसौर, नीमच सहित समस्त क्षेत्र में वैदिक सनातन संस्कृति के उत्थान, संरक्षण एवं जनजागरण के लिए व्यापक अभियान चलाया जाएगा। जब तक समाजजन की दहलीज तक सन्देश नहीं जायेगा तब तक परिवर्तन नही आयेगा ! उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में धार्मिक आयोजनों में वैदिक परंपराओं का ह्रास तथा धर्म के क्षेत्र में बढ़ते राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण धार्मिक वातावरण प्रभावित हो रहा है। समाज को वैदिक परंपराओं के प्रति जागरूक कर धर्म को उसके मूल स्वरूप में स्थापित करने का प्रयास किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि आगामी धार्मिक उत्सवों एवं आयोजनों में वैदिक मर्यादाओं का पालन सुनिश्चित किया जाएगा। स्थापित मंदिरों की उपेक्षा कर सार्वजनिक स्थलों एवं चौराहों पर होने वाले अव्यवस्थित धार्मिक आयोजनों के प्रति समाज को जागरूक किया जाएगा तथा वैदिक विधि-विधान के अनुरूप यज्ञ, हवन एवं धार्मिक अनुष्ठानों को प्रोत्साहित किया जाएगा।
बैठक में संत समाज की गरिमा एवं सम्मान को सर्वोच्च प्राथमिकता देने, कर्मकाण्ड से जुड़े विद्वानों एवं पुरोहितों की व्यवस्थागत समस्याओं के समाधान, गौमाता के संरक्षण हेतु गौभक्तों के सहयोग से व्यापक अभियान चलाने तथा आर्थिक रूप से कमजोर संतों एवं आश्रमों को समाज से जोड़कर उन्हें आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने का भी निर्णय लिया गया।
इस अवसर पर परम पूज्य शिवानन्द जी सरस्वती , योगी योगेश नाथ जी महाराज ने कहा कि वर्ष 2028 में उज्जैन में आयोजित होने वाले सिंहस्थ महापर्व में संत समाज, ऋषि परंपरा, शासन एवं प्रशासन के समन्वय से व्यवस्थाओं को सफल बनाने का प्रयास किया जाएगा। विशेष रूप से रतलाम एवं आसपास के क्षेत्रों से आने वाले धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए समय-समय पर बैठकें आयोजित कर आवागमन, वाहन व्यवस्था, मार्ग में विश्राम, भोजन एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं की विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
इस अवसर पर परम पूज्य दंडी स्वामी आत्मानंद जी सरस्वती ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि रतलाम, मंदसौर एवं नीमच क्षेत्र के लिए यह अत्यंत सौभाग्य का विषय है कि क्रांतिकारी संत के रूप में महामंडलेश्वर श्रीश्री 1008 आनंद गिरि जी महाराज का सान्निध्य प्राप्त हुआ है। उनके नेतृत्व में निश्चित रूप से इस क्षेत्र में वैदिक सनातन संस्कृति का व्यापक जागरण होगा तथा समाज में आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक परिवर्तन की नई चेतना का संचार होगा।
बैठक का समापन वैदिक सनातन संस्कृति के संरक्षण, गौसेवा, पर्यावरण संरक्षण, संत सम्मान एवं समाज जागरण के सामूहिक संकल्प के साथ सम्पन्न हुआ। बैठक ऋषि सन्त सहित पूर्व सरपंच सुभाष जी पांचाल सजापुर , लोकेंद्र सिंह अयाना , लखन टांक , भागीरथ पादिदार आदि उपस्थित रहे !