
दहाणु। प.पूज्य परोपकार सम्राट गच्छाधिपति मोहनखेडा़ महातीर्थ विकास प्रेरक गुरुदेव आचार्य प्रवर श्रीमद्विजय ऋषभचन्द्र सूरीश्वरजी म.सा.के आशीर्वाद से स्थापित श्री मोहनखेडा़ गुरुधाम तीर्थ दहाणु मे आज दिनांक 19 अप्रैल को प.पूज्य गच्छाघिपति आचार्यदेव श्रीमद्विजय जयानंद सूरीश्वरजी म.सा.आदि ठाणा का प्रातः वाजते गाजते सामैया के साथ मंगल प्रवेश हुआ। तीर्थ मार्गदर्शक तीर्थ प्रेरणा प्रदाता बंधु बेलडी प.पूज्य वरिष्ठ मुनिराज श्री पीयूषचन्द्र विजयजी म.सा.एवं प.पूज्य प्रवचनदक्ष मुनिराज श्री रजतचन्द्र विजयजी म.सा.ने तीर्थ परिसर गेट पर आचार्य श्री की विनय पूर्वक ट्रस्ट मंडल के साथ जाकर आगवानी की। ट्रस्ट मंडल की ओर से श्रीमती पारसमणी देवी महेन्द्र कुमारजी भंडारी द्वारा सामैया गहूंलीकर स्वागत किया गया। आचार्यश्री ने जिन मंदिर एवं गुरु मंदिर के दर्शन वंदन किये वरिष्ठ मुनिराज श्री पीयूषचन्द्र विजयजी ने अपने उद्बोधन मे कहां कि प.पूज्य कविरत्न मोहनखेडा़ महातीर्थ उद्धारक गुरुदेव आचार्य प्रवर श्रीमद्विजय विद्याचन्द्र सूरीश्वरजी म.सा.के 11 शिष्यों मे से गच्छाघिपति आचार्य पद पर इस जिनशासन एवं गुरुगच्छ में चतुर्विघ संघ का नेतृत्व करने का प.पूज्य आचार्य श्री रवीन्द्र सूरीश्वरजी म.सा.आचार्य श्री ऋषभचन्द्र सूरीश्वरजी म.सा. एवं आचार्य श्री जयानंद सूरीश्वरजी म.सा.को अवसर प्राप्त हुआ। ये बडे सौभाग्य की बात है की आज आचार्य श्री जयानंद सूरीश्वरजी म.सा.यहा पधारे। अंत मे आचार्यश्री ने मांगलिक श्रवण कराई। तीर्थ के ट्रस्टीगण ललितजी पुनमीया एवं हितेशजी राजावत ने सभी का आभार प्रकट किया। कुछ समय आचार्यश्री ने बंधु बेलडी़ से चर्चा कर आगे की ओर विहार किया। उल्लेखनीय है कि बंधु बेलडी वर्षीतप पारणोत्सव हेतु तीर्थ पर विराजित है। जहां 23 अप्रैल को त्रिदिवसीय जिनेन्द्र भक्ति महोत्सव धूमधाम के साथ पारणा संपन्न होगा।