मत डालो किसी के बनते काम मे बाधा, अंतराय कर्म उदय होने पर परमात्मा नहीं बच सके तो हम क्या बचेंगे-समकितमुनिजी

  • बिना कामना व इच्छा के परमात्मा की भक्ति से जो मिलेगा उसकी कल्पना नहीं कर सकते
  • वर्षीतप पारणा महोत्सव के दूसरे दिन उमड़ा आस्था और श्रद्धा से ओतप्रोत भक्तों का सैलाब

नासिक (निलेश कांठेड़ ) । चाहे आप अपने ही संपन्न,प्रभावशाली व शक्तिशाली क्यों ना हो लेकिन जब कर्मों का उदय होता है तो सारा प्रभाव समाप्त हो जाता है। उस समय कोई सहयोग करने वाला नहीं आता है जब अपने ही कर्मों का उदय होता है। परमात्मा का विचरण चल रहा है लेकिन लाभ अंतराय कर्म का ऐसा उदय हुआ है कि आहार नहीं मिल रहा है। किसी के लाभ में जब-जब हम विध्न डालेंगे तब हमारे लाभ अंतराय कर्म का बंध होगा। जिंदगी में कभी किसी के बनते हुए काम बिगाड़ने का कर्म नहीं करना चाहिए। ये विचार श्रमणसंघीय सलाहकार सुमतिप्रकाशजी म.सा. के सुशिष्य आगमज्ञाता, प्रज्ञामहर्षि, वाणी के जादूगर डॉ. समकितमुनिजी म.सा. ने शनिवार को नासिक के धनदाई लांस में तीन दिवसीय वर्षीतप पारणा महोत्सव के दूसरे दिन धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए व्यक्त किए। समकित की वाणी सुनने को आतुर आस्था और श्रद्धा से ओतप्रोत भक्तों का ऐसा सैलाब उमड़ा की विशाल सभागार भी छोटा प्रतीत हो रहा था। समकितमुनिजी ने भगवान आदिनाथ कथा का वाचन जारी रखते हुए कहा कि तीर्थंकर के जीवन एवं परभव का वर्णन बड़ा हृदयस्पर्शी एवं रोमांचकारी होता है। तीर्थंकर बनने की यात्रा में कई उतार-चढ़ाव आते हैं यह बिल्कुल सपाट रास्ता नहीं है। सब पारकर आत्मा जब आगे बढ़ती है तो उस ऊंचाई को प्राप्त करती है जहां से कभी नीचे गिरना नहीं होता है। मुनिश्री ने कहा कि आदिनाथ प्रभु 4000 जीवो के साथ जब दीक्षा लेते हैं तो उस समय नारकीय जीवों को भी पल भर की शांति मिल जाती है। तीर्थंकर के दीक्षा लेते ही चौथा ज्ञान उपलब्ध हो जाता है। आदिनाथ भगवान के जन्म, वर्षीदान, दीक्षा, निर्वाण व समवोशरण की रचना के समय देवता आते हैं लेकिन जब उनको साल भर आहार नहीं मिल रहा तो देवता नहीं आए। यह बताता है कि कर्मों का उदय होने पर कोई सहायता नहीं कर सकता। पूज्य समकितमुनिजी ने कहा कि कभी इस भुलावे में मत रहना की तीर्थंकर कुछ देते नहीं है, वह बहुत कुछ देते हैं लेकिन दिखते नहीं हैं। ये पाने के लिए उनमें अटूट श्रद्धा आस्था व विश्वास पहली शर्त है। जिंदगी में कभी मांगना पड़े तो तीर्थंकर से मांगो उनसे जो मांगो वह मिलेगा लेकिन बिना कामना व इच्छा के जो परमात्मा की भक्ति व साधना करता है उससे जो विराट मिलता है उसकी कल्पना भी नहीं कर सकते है।
भक्ताम्बर पाठ से हुआ धर्मसभा का आगाज
उप प्रवर्तक श्री प्रमोदमुनिजी म.सा., पूज्य समकितमुनिजी म.सा. एवं महासाध्वी
प्रितिसुधाजी के सानिध्य में तीन दिवसीय वर्षीतप पारणा महोत्सव के दूसरे दिन शनिवार सुबह धर्मसभा का आगाज भगवान आदिनाथ की स्तुति भक्ताम्बर पाठ से शुरूआत हुआ।भक्ताम्बर पाठ प्रेरणाकुशल भवान्त मुनिजी ने कराया। इस दिन को तपस्या दिवस के रूप में भी मनाया गया। पूज्य समकितमुनिजी ने कई श्रावक-श्राविका को उपवास, एकासन, आयंबिल जैसे तप के प्रत्याख्यान कराए। पूज्य जयवन्त मुनिजी ने प्रेरणादायी गीत ‘तपस्या जीवन का श्रृंगार सारा ज्ञानी कहे’ की प्रस्तुति दी।
पारणा करने से पहले दे वर्षीतप करने की प्रेरणा
धर्मसभा में महासाध्वी
प्रितिसुधाजी मसा ने वर्षीतप करने की प्रेरणा प्रदान करते हुए कहा कि उपवास, एकासन, आयम्बिल किसी भी तरह का वर्षीतप अवश्य करे। उन्होंने कहा कि जो तपस्वी पारणा करेगे वह भी ऐसा करने से पहले किसी को ये महान तप साधना करने के लिए प्रेरणा अवश्य दे ताकि तप साधना का दौर निरन्तर चलता रहे। पूज्य साध्वी मधुस्मिता ने भगवान ऋषभदेव की महिमा बताते हुए कहा कि अपने बच्चों को अपने धर्म के गौरवमय इतिहास से अवश्य परिचित कराए। उन्हें बताए अयोध्या भगवान राम की ही नहीं हमारे प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव की भी नगरी है। उन्होंने कहा कि भक्ताम्बर पाठ हमे अरिहन्त प्रभु से जोड़ने वाली कड़ी है। धर्मसभा में पूज्य विजयमुनिजी म.सा., भूषणमुनिजी म.सा., साध्वी निर्मलाजी आदि ठाणा का भी सानिध्य मिला।
पूज्य समकितमुनिजी एवं 108 तपस्वी करेगे वर्षीतप का पारणा
उप प्रवर्तक श्री प्रमोदमुनिजी म.सा. एवं पूज्य समकितमुनिजी म.सा. के सानिध्य में तीन दिवसीय वर्षीतप पारणा महोत्सव का समापन अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर रविवार को तपस्वियों के पारणा एवं अनुमोदना के साथ होंगा। आगममर्मज्ञ पूज्य समकितमुनि जी म.सा. तीसरे वर्षीतप का पारणा करेगे। उनके सानिध्य में इस अवसर पर वर्षीतप की महान साधना करने वाले 108 तपस्वी श्रावक- श्राविका भी पारणा करेगें। तपस्वियों की अनुमोदना के लिए विभिन्न स्थानों से श्रावक नासिक पहुचेगे। अक्षय तृतीया के अवसर पर 23 अप्रेल को सुबह 7 से 8.15 बजे तक वर्षीतप तपस्वी वरघोड़ा निकाला जाएगा। सुबह 8.15 से 11 बजे तक प्रवचन के बाद सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक वर्षीतप तपस्वी पारणा महोत्सव होगा।
नासिक की तरह ही भीलवाड़ा चातुर्मास बना धर्मभक्ति की मिसाल
धर्मसभा में चैन्नई से एलआर चेल्लानी परिवार के साथ भीलवाड़ा, चितोड़गढ़, मैसूर, नंदुरबार, जयपुर आदि स्थानों से आए कई श्रावक-श्राविका मौजूद थे। पूज्य समकितमुनिजी ने धर्मलाभ के लिए पधारे सभी श्रावकों के प्रति मंगलभावनाये व्यक्त करने के साथ कहा भीलवाड़ा चातुर्मास भी हमेशा याद रहेगा जहां नासिक की तरह ही पर्युषण के बाद भी यानी चारो माह भक्तों का सैलाब उमड़ा ओर जिनशासन भक्ति की मिसाल कायम की। नासिक के श्रावकों की धर्मभक्ति भी लाजवाब है। धर्मसभा में भीलवाड़ा से सुश्रावक लादूसिंह धूपिया, नरेंद्र पीपाड़ा, प्रकाश पारख, रतनलाल झामड, महावीर कच्छारा, आनन्द चपलोत, निलेश कांठेड़, अनिल लोढ़ा, संगीता सुराना, चित्तौड़गढ़ से कमल बोहरा सहित विभिन्न स्थानों से भक्तगण तपस्या अनुमोदन, धर्म लाभ व गुरु दर्शन के लिए पधारे थे। नासिक श्रीसंघ की ओर से आयोजन सफल बनाने और जीव दया कार्य मे सहयोग करने वाले दानदाताओं का सम्मान किया गया।

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