संस्कृत वांग्मय में विश्व बंधुत्व एवं विश्व कल्याण निहित है- डॉ. बालकृष्ण शर्मा

कालिदास संस्कृत अकादमी म.प्र. संस्कृति परिषद उज्जैन द्वारा संस्कृत काव्य माधुरी कालिदास का शब्द सौन्दर्य शीर्षक पर व्याख्यनमाला सम्पन्न

रतलाम । शासकीय कला एवं विज्ञान महाविद्यालय रतलाम में कालिदास संस्कृत अकादमी मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद उज्जैन एवं संस्कृत विभाग के तत्वावधान में सारस्वत व्याख्यानमाला एवं संस्कृत काव्य माधुरी कार्यक्रम का आयोजन किया गया । कार्यक्रम के प्रारम्भ में अतिथियों द्वारा माँ सरस्वती के चित्रपर पुष्प अर्पित कर दीप प्रज्जवलन किया गया तथा महाविद्यालय परिवार द्वारा अतिथियों का स्वागत किया गया ।
कार्यक्रम में सारस्वत अतिथि के रूप में डॉ.बालकृष्ण शर्मा पूर्व कुलपति विक्रम विश्वविद्यालय ने अपने उदबोधन में कहा कि संस्कृत वांग्मय विश्व बंधुत्व एवं विश्व कल्याण की भावनाओं से ओतप्रोत है कालिदास के साहित्य का अध्ययन करने से भारतीय संस्कृति का ज्ञान मिलता है। $ आयोजन की अध्यक्षता कर रहे डॉ. मुरलीधर चांदनी वाला ने कहा कि मेघदूतम और अभिज्ञान शाकुंतलम् में पर्यावरण संरक्षण एवं नैतिक मूल्यों के प्रसंग सर्वत्र उपलब्ध हैं इनका जीवन में अमल किया जाए तो चारित्रिक एवं नैतिक उत्थान अवश्य होगा।
वनस्थली विद्यापीठ से आई डॉ. अंजना शर्मा ने महाकवि कालिदास के काव्य में शब्द सुंदरी के बारे में विस्तार पूर्वक बताते हुए कहा कि शब्द का चयन करने में भी अनुशासन का पालन किया जाता है । शब्द कि महिमा शब्द, अर्थ कि गंभीरता एवं सार्थक पद पर विस्तार पूर्वक प्रकाश डाला । महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. वाय. के. मिश्र ने कालिदास एवं उनके साहित्य की वर्तमान प्रासंगिकता पर विचार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि कालिदास को जन-जन तक पहुंचाने के लिए उनके साहित्य का अध्ययन सभी को करना चाहिए ।
प्रारम्भ में डॉ. संतोष पांडेय निदेशक कालिदास संस्कृत अकादमी ने कहा कि संस्कृत साहित्य को एवं उसमें निहित संदेश जन जन तक पहुंचाने के लिए कालिदास एवं उनके साहित्य को पढऩा होगा । कालिदास जन-जन के कवि हैं उनके साहित्य में आश्रम व्यवस्था, पर्यावरण, ज्ञान,विज्ञान आदि के संदर्भ आज भी प्रासंगिक हैं।
व्याख्यान माला के पश्चात संगीत कार्यक्रम में पंडित शैलेंद्र भट्ट एवं पंडित अजय मेहता के संगीत निर्देशन में कलाकारों ने शंकराचार्य द्वारा रचित स्त्रोत एवं वेद मंत्रों की उम्दा प्रस्तुति दी गई।
इस अवसर पर महाविद्यालय के सभी प्राध्यापक गण एवं विभिन्न स्थानों से आए हुए सुधी श्रोतागण बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का सफल संचालन संस्कृत विभाग कि विभागाध्यक्ष डॉ. ललिता मरमट  ने किया एवं आभार डॉ.रियाज मंसूरी ने किया।