श्री धर्मदास जैन मित्र मंडल स्थानक में प्रवचन
रतलाम, 27 अप्रैल। मानव का शरीर बहुत उपकारी होता है। जीवन में इसका उपयोग करे, उपभोग कभी नहीं करना चाहिए। महापुरूष शरीर का उपयोग आत्मा के कल्याण के लिए करते है। महापुरूष हमेशा कृतज्ञ भाव से परिपूर्ण रहते है।
यह बात श्रमण संघीय प्रवर्तक श्री प्रकाशमुनिजी मसा ने नोलाईपुरा स्थित श्री धर्मदास जैन मित्र मंडल स्थानक में प्रवचन के दौरान कही। उन्होंने कहा कि शरीर की सुंदरता पर ध्यान नहीं देना चाहिए। कमल हमेशा कीचड में ही खिलता है। इसलिए शरीर की सहायता से आत्मा का कमल खिलाने का प्रयास करना चाहिए। आत्मा दृष्टा और ज्ञाता होती है। सर्वज्ञ आत्मा वो होती है, जो देखने और जानने के बाद भी प्रतिक्रिया नहीं करती। प्रतिक्रिया नहीं होती है, तो कर्म का बंधन नहीं होगा और इससे ही आत्मा के कल्याण का मार्ग प्रशस्त होगा।
प्रवर्तकश्री ने कहा कि ज्ञानी व्यक्ति शरीर का उपकारी मानता है और पुरूषार्थ करता है। जीव मात्र की रक्षा और धर्म के लिए पुरूषार्थ करना ही शरीर का साधना कहलाता है। देह जब सधती है, तभी साधना प्रबल होती है। उन्होंने कहा कि आत्मा सहज गुणी है। समय-समय पर इसके गुणों का प्रदर्शन होता है। वर्तमान युग में लोग अहम भाव में माता-पिता के प्रति कुछ नहीं देने की शिकायत करते है, जबकि मनुष्य शरीर उनकी ही देन है। इसलिए उनका उपकार कभी नहीं भूलना चाहिए। व्यक्ति जब अपने माता-पिता और गुरू के प्रति कृतध्न होता है, तो उसे नर्क रूपी जीवन मिलता है। कृतध्नता से बचकर सबकों प्राणी मात्र के प्रति कृतज्ञ रहना चाहिए।
प्रवचन के दौरान पंडित रत्न श्री महेन्द्र मुनिजी मसा, श्री दर्शनमुनिजी मसा, श्री अभिनंदन मुनि जी मसा और महासती श्री चंदनबाला जी मसा, श्री रमणीक कुंवर रंजन जी मसा, श्री कल्पनाश्रीजी मसा, श्री चंदना जी मसा, श्री लाभोदया जी मसा, श्री जिज्ञासा जी मसा आदि ठाणा उपस्थित रहे। संचालन सौरभ मूणत ने किया। अंत में प्रभावना का वितरण श्री धर्मदास जैन मित्र मंडल ट्रस्ट द्वारा किया गया।
मालव केसरी की मासिक जयंती पर होंगे जाप
मालव केसरी, महाराष्ट्र विभूषण, श्रमण संघ प्रणेता, प्रसिद्ध वक्ता पूज्य गुरुदेव 1008 श्री सौभाग्यमलजी मसा की मासिक जन्म जयंती 28 अप्रैल जप-तप के साथ मनेगी। श्रमण संघीय प्रवर्तक श्री प्रकाश मुनिजी मसा की निश्रा में इस मौके पर सुबह 8 बजे से जाप होंगे। इसके बाद प्रवचन रखे गए है।