लेखक – प्रो.डी.के.‘शर्मा
47,देवप्रभा, राजपूत बोर्डिंग कॉलोनी रतलाम(म.प्र.)
सम्पर्क-7999499980
देश में चार प्रकार के विश्वविद्यालय है और नवम्बर 2022 तक इनकी कुल संख्या 1070 है। सबसे अधिक संख्या वाला राज्य गुजरात है ंिजसमें कुल 94 विश्वविद्यालय हैं। इनमें 60 निजी है। इनके अतिरिक्त देश में कई संस्थान है जिन्हें अपना काम स्वंय करने की अनुमति मिली हुई है। इन्हें स्वशासी कहते हैं। कई पाठ्यक्रम में विद्यार्थियों को प्राइवेट बैठने की अनुमति मिली हुई है। देश में कॉलेज स्तर की पढ़ाई करने वाले विद्यार्थी असंख्य है। इनमें से कुछ नियमित और कुछ प्राइवेट अध्ययन करते हंै। कुछ वर्षों पूर्व तक देश के विश्वविद्यालय और उनसे सम्बंद्ध महाविद्यालयों की परीक्षाएं निश्चित समय पर होती थी। 1 मई से 30 जून तक अवकाश रहता था। यह आवश्यक भी था क्योंकि मई जून में गर्मी देश में बहुत अधिक होती है। पिछले कुछ वर्षों से यह व्यवस्था बिगड़ गई है। अब मई जून की भयंकर गर्मी में पढ़ाई भी होती है और परीक्षाएं भी। अब 45डिग्री से अधिक की गर्मी में विद्यार्थी पढ़ाई या परीक्षा के लिए आते जाते दिखाई देते हैं। इतनी गर्मी में विद्यार्थियों को पढ़ने अथवा परीक्षा देने के लिए बुलाना अनुचित ही नही अमानवीय है।
यह बहुत आवश्यक है कि देश के सभी विश्वविद्यालयों में प्रवेश एक साथ हो इससे विद्यार्थियों को एक विश्वविद्यालय से दूसरे विश्वविद्यालय में प्रवेश लेने में सुविधा रहेगी। वर्तमान में एक स्थान से दूसरे स्थान एवं एक प्रदेश से दूसरे प्रदेश में जाने की गति बहुत बढ़ गई है। अखिल भारतीय सेवा , बैंक कर्मचारियों, मल्टी नेशनल में काम करने वाले, व्यापार करने वाले एक राज्य से दूसरे राज्य आते जाते रहते हैं। ऐसे में सभी विश्वविद्यालयों के कार्यक्रम एक साथ नहीं होने से उनको बहुत परेशानी होती है। ऐसे कई परिवार हंैंं जिनके मुखिया परिवार से अलग रहते हैं। इससे आर्थिक बोझ पड़ता है और भावनात्मक परेशानी भी होती है। परिवार की सुरक्षा की चिन्ता भी रहती है। अतः लोगो का कष्ट कम करने के लिए भी सभी विश्वविद्यालय की गतिविधियां एक साथ होनी चाहिए।
प्रवेश, परीक्षा परिणाम और अवकाश एक साथ नही होने से विद्यार्थियों का समय भी खराब होता है। कई बार पूरा एक साल बर्बाद हो जाता है। उदाहरण के लिए नीट की परीक्षा का परिणाम आने के बाद प्रवेश प्रक्रिया पूरी होने में 6 माह से अधिक का समय लग जाता है। इससे विद्यार्थी का पूरा वर्ष बर्बाद हो जाता है। उचित है कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग नें सभी विश्वविद्यालय के लिए संयुक्त प्रवेश परीक्षा प्रारम्भ की है। उन्हें सभी विश्वविद्यालयों के वार्षिक केलैंडर पर भी नजर रख कर अस्त व्यस्त व्यवस्था को सुव्यवस्थित करना चाहिए। इससे विद्यार्थियों का समय और धन दोनो बचेंगे। समय पर परीक्षा होने से विद्यार्थी 45,50 डिग्री की गर्मी में परीक्षा देने के कष्ट से बच जाएगें। यह मानवीय आधार पर बहुत आवश्यक है।
यह र्दुभाग्य है कि देश और राज्य की सरकारें उच्च शिक्षा को व्यवस्थित करने के लिए ध्यान नही दे रही है। नई शिक्षा नीति में कई सुधार प्रस्तावित है। साथ यह भी आवश्यक है कि विश्वविद्यालय के कैलेंडर को समयबद्ध किया जाए। मई जून की गर्मी में विद्यार्थियों को परीक्षा देने के लिए मजबूर करना अत्याचार है।