

रतलाम। भारतीय साहित्य विश्व को नई दिशा दे रहा है। भारतीय साहित्य में वसुधेव कुटुम्बकम् का भाव है विश्व कल्याण का भाव है। जिसे साहित्यकार कवि अपनी रचना के माध्यम से समाज के सामने रखता है। राजेन्द्र श्रोत्रिय की कविता सामाजिक मूल्यों कि धरोहर है।
उक्त विचार मुख्य अथिति प्रवासी साहित्यकार रामा तक्षक ने नीदरलैंड के व्लुटन शहर में तिरंगे की साक्षी में आयोजित काव्य समारोह में व्यक्त किये। काव्य समारोह में श्रोत्रिय ने कविता की पंक्तियाँ
रहे कहीं पर भी इतना भान रहे
होठों पर सदा स्वदेशी अभिमान रहे
संस्कृति संस्कार अपनापन ना भूले
दिल में सदा हिंदुस्तान रहे ॥
पढ़ी तो सदन तालियो से गूँज उठा।
श्रोत्रिय ने राजनीतिक,सामाजिक,शृंगार व राष्ट्रीय गीतों से देश भक्ति का अलख जगाया। कार्यक्रम में रामा तक्षक ने भी अपनी राष्ट्रीय व माँ की रचना से वाही वाही लूटी। काव्य समारोह में प्रवासी भारतीय संघ द्वारा राजेन्द्र श्रोत्रिय को प्रशस्ती पत्र प्रदान कर “काव्य गौरव” सम्मान एवम् रामा तक्षक को “हिन्दी गौरव “ सम्मान से सम्मानित किया गया। श्रोत्रिय ने एक बार फिर नगर को विदेशी धरती पर गौरवान्वित किया। कार्यक्रम में मध्य प्रदेश ,राजस्थान,तमिलनाडु,महाराष्ट्र,छत्तीसगढ़,उत्तरप्रदेश गुजरात ,आन्ध्रप्रदेश ,बिहार राज्य के प्रवासी भारतीय की उपस्थिति लघु भारत का दर्शन करा रही थी। अथितियों का स्वागत अर्चिता श्रोत्रिय,विवेक दीपक,राम कृष्णन, प्रवीणा, सोमकांत मिश्रा,प्राची श्रीवास्तव,विशाल सेठे,अमृतेश सिह,विवेक जयश्री तिवारी ,अनुपमा,अभिषेख शिखा जैन ,शरद ,अंकित जैन ,आरती,स्वाति,अनुपमा,तुषार बंगाली ,प्रनेश,जया सुमित ,निखार कृति शाह , जया सुमित मानसी गुप्ता आदि ने किया। अथिति परिचय विवेक दीपक ने दियस। संचालन आशुतोष गुप्ता ने किया। आभार अर्चिता श्रोत्रिय ने व्यक्त किया।