आत्म दृष्टि से रतलाम वालों को जागरण का संदेश देने आए है- आचार्य प्रवर विजयराजजी मसा
रतलाम,13 जून। परम पूज्य, प्रज्ञा निधि, युगपुरूष आचार्य प्रवर 1008 श्री विजयराजजी मसा ने मोहनबाग में उपस्थित श्रद्धालुओं को कहा कि जागरण दो प्रकार के होते है। देह का जागरण और आत्मा का जागरण। देह जागरण द्रव्य का जागरण कहलाता है, जबकि आत्मा का जागरण भाव जागरण होता है। रतलाम वाले देह दृष्टि से जगे हुए है, हम उन्हे आत्म दृष्टि से जागरण का संदेश देने आए है।
आचार्यश्री एवं उपाघ्याय, प्रज्ञारत्न, विद्वद्ववरेण्य श्री जितेश मुनिजी मसा आदि ठाणा-13 एवं महासतियाजी आदि ठाणा-15 का वर्षावास इस वर्ष रतलाम में होगा। श्री वर्षावास हेतु सबका हुक्मगच्छीय साधुमार्गी शान्त-क्रांति जैन श्रावक संघ रतलाम के तत्वावधान में 27 जून को नगर में भव्य चातुर्मासिक मंगल प्रवेश होगा। इससे पूर्व आचार्य प्रवर 11 दिवसीय मौन साधना पूर्ण कर 26 जून को सुबह 10 बजे मोहन बाग सैलाना रोड पर महामांगलिक श्रवण कराएंगे। इसके बाद 27 जून को चातुर्मास मंगल प्रवेश होगा। प्रवेश जुलुस सुबह 8 बजे मोहन बाग से प्रारंभ होकर सागोद रोड स्थित जैन स्कूल पहुंचेगा। जैन स्कूल परिसर में प्रवचन के बाद गौतम प्रसादी का आयोजन किया जाएगा।
मोहन बाग में आचार्यश्री ने उठो नर-नारियों जागो, जगाने संत आए है भजन की पंक्तियों के संबोधन प्रारंभ कर जागरण का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि मुनि आत्मा से जागृत होते है, वे ही दूसरों को जागृत होने का उपदेश दे सकते है। व्यक्ति जब जगने और जगाने के लिए संतों के सानिध्य में आता है, तो उसे पता होना चाहिए कि आत्मा का जागरण ही वास्तविक होता है। हम सबकों आत्म जागरण प्राप्त करना है, क्योंकि जो आत्म दृष्टि को प्राप्त कर लेेते है, वे ही अपनी मंजिल को पाते है। हर व्यक्ति को देह और आत्मा का पृथक-पृथक संबंध जानना चाहिए। अन्यथा यह भ्रम बना रहता है कि आत्मा और देह एक ही है। वास्तव में देह मृण्मय और आत्मा चिन्मय हैं। चिन्मय आत्मा का ज्ञान सच्चा और वास्तविक है, जो इसे प्राप्त कर लेता है, वह देह में आसक्त नहीं होता।
धर्मसभा को महासती श्री ख्यातिश्रीजी मसा ने भी संबोधित किया। संचालन कमल मेहता ने किया। प्रवचन पश्चात श्री संघ द्वारा गौतम प्रसादी का आयोजन किया गया। इसमें बाहर से पधारे संघों चेन्नई, बीकानेर, मुंबई, मंदसौर और इंदौर आदि के श्रावक-श्राविकागण शामिल हुए।