



पुना गंगाधाम । शेलेशजी एवं यतिनजी पारेख के घर आंगन में पूज्य परोपकार सम्राट आचार्यदेव श्रीमद्विजय ऋषभचंद्र सूरीश्वरजी म.सा.के आज्ञानुवर्ती शिष्य वरिष्ठ मुनिप्रवर श्री पीयूषचंद्र विजयजी म.सा. प्रवचनदक्ष मुनिराज श्री रजतचद्र विजयजी म.सा.मुनिश्री प्रीतियश विजयजी म.सा.का समैया के साथ मंगल प्रवेश हुआ। राखीबेन खुशी बेन पारेख मंगल कलश लेकर चल समारोह में आगे चल रहे थे। श्री चंद्रप्रभु स्वामी जिनालय से वाजते गाजते गंगाधाम फेज-1 में आगमन हुआ। सर्वप्रथम गुरुवंदन मंगलाचरण के पश्चात अहर्त ध्यानयोगी आचार्यदेव श्री रवीन्द्र सूरीश्वरजी म.सा.के चित्र पर माल्यार्पण किया गया एवं धुप दीप प्रज्वलन हुआ। सुरि रविंद्र गुणानुवाद धर्मसभा में मुनि पीयूषचंद्र विजयजी ने कहा रवीन्द्र सूरीश्वरजी धैर्यता के स्वामी थे। उनके बारे में कुछ भी कहने वाले को भी वे आशीर्वाद देते थे। वे साधक थे अपनी साधना से संघ समाज का उपकार किया। जन्म से देवलोक तक की विशिष्ट बातें मुनि श्री पीयूषचंद्र विजयजी ने बताई। मुनिश्री रजतचंद्र विजयजी ने कहा सुरि रवींद्र के जीवन में चमत्कार भी था व उपकार भी था। सैंकड़ों आचार्य व साधुसाध्वी के संकट इन्होंने दूर किये। कई बातें अपने ज्ञान ध्यान से पूर्व में ही बताते थे। मुनिश्री प्रीतियश विजयजी ने सुरि रवींद्र को महान व उपकारी बताया ।उनकी साधन अद्भुत थी।धर्मसभा पश्चात गुरुभक्त परिवार की ओर से श्रीसंघ की नवकारसी रखी गई। प्रवीण जैन संगीतकार तरुण मोदी देवेन्द्र पारेख दिलीपजी जैन सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे।
18 जून रविवार को जय जिनेंद्र प्रतिष्ठान भवन में 108 जोड़े से युक्त श्री चिंतामणि पारसनाथ भगवान का अनुष्ठान पुणे की पावन धरती पर सर्वप्रथम बार किया जाएगा।