मंगल प्रवेश यात्रा में जयकारों से गूंज उठा मार्ग
रतलाम। आचार्यश्री उमेशमुनिजी के शिष्य प्रवर्तकश्री जिनेंद्रमुनिजी के आज्ञानुवर्ती तपस्वीश्री दिलीपमुनिजी, रविमुनिजी, आदित्यमुनिजी एवं रतलाम गौरव अमृतमुनिजी ठाणा 4 का चातुर्मासार्थ श्रीधर्मदास जैन मित्र मंडल नौलाईपुरा स्थानक पर मंगल प्रवेश हुआ। मुनिमंडल की अगवानी हेतु बड़ी संख्या में श्रावक, श्राविकाएं व बच्चें शहर के कस्तूरबा नगर स्थानक पर पहुंच गए थे। इस प्रसंग पर सभी का उत्साह देखते ही बनता था। यहां श्रीधर्मदास जैन श्रीसंघ कस्तूरबा नगर मिल क्षेत्र द्वारा सभी उपस्थितजन की नवकारसी का आयोजन किया गया।
नगर की कालोनियों में धर्म प्रभावना की
श्रीधर्मदास जैन श्रीसंघ के अध्यक्ष अशोक चतुर व महामंत्री अजीत मेहता ने बताया कि यहां स्थानक भवन पर प्रवेश के पूर्व मुनि मंडल ने संत नगर, मंगलम सिटी, स्टेशन रोड़, राजस्व कॉलोनी, कस्तूरबा नगर आदि क्षेत्रों में महती धर्म प्रभावना की। इन क्षेत्रों में शेषकाल के दौरान मुनि मंडल के मिले पावन सानिध्य का श्रावक श्राविकाओं व बच्चों ने विभिन्न आराधनाओं के माध्यम से अभूतपूर्व लाभ लिया।
मंगल प्रवेश पर जबरदस्त उमड़ा सैलाब
मुनि मंडल के चातुर्मास प्रवेश को लेकर श्रीसंघ में उत्साह देखा गया। मंगल प्रवेश पर श्रावक श्राविकाओं का जबर्दस्त सैलाब उमड़ पड़ा। मुनि वृंद में रतलाम गौरव अमृतमुनिजी का यहां दीक्षा के पश्चात प्रथम चतुर्मास होगा। आप वीर पुत्र सौरभ मूणत के सांसारिक पिता है। रास्तेभर में श्रावक, श्राविकाएं व बच्चें भगवान महावीर स्वामी, आचार्यश्री उमेशमुनिजी, प्रवर्तकश्री जिनेंद्रमुनिजी एवं मुनि वृंद आदि की जय जयकार और गुरु गुणगान करते हुए चल रहे थे। वहीं मुनि मंडल ने कई वृद्ध श्रावक श्राविकाओं को मांगलिक श्रवण करवाई। अगवानी के दौरान नगर सहित अखिल भारतीय श्रीधर्मदास स्थानकवासी जैन युवा संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीरज मूणत, वरिष्ठ स्वाध्यायी सुरेंद्र पितलिया के अलावा लिमड़ी, झाबुआ, पेटलावद आदि कई स्थानों के श्रावक श्राविकाएं उपस्थित थे। चातुर्मास मंगल प्रवेश यात्रा कस्तूरबा नगर से प्रारंभ हुई जो राम मंदिर, चेतक ब्रिज, सैलाना बस स्टैंड, शहर सराय, धान मंडी, गणेश देवरी, बजाज खाना, चांदनी चौक, चौमुखी पुल होती हुई श्रीधर्मदास जैन मित्र मंडल नौलाईपुरा स्थानक पर पहुंचकर धर्मसभा में परिवर्तित हो गई।
अपनी शक्ति का गोपन नहीं करे
धर्मसभा में तपस्वीश्री दिलीपमुनिजी ने कहा कि हर साल चातुर्मास मिलता है, परंतु चातुर्मास में क्या प्राप्त किया इसका महत्व है। अपनी शक्ति का गोपन नहीं करते हुए शक्ति के अनुसार इस वर्षावास में ज्ञान, दर्शन, चारित्र, तप आदि की विशिष्ट आराधना करना है। एक एक दिन हमारे लिए बहुत कीमती है। समय की कीमत को समझना है, क्योंकि बिता हुआ समय वापस आने वाला नहीं है। रविमुनिजी ने कहा कि वर्षावास धर्म आराधना करने के लिए मांगा जाता है। इस बार 148 दिन का चातुर्मास है। इस पांच माह के वर्षावास में अधिक से अधिक आराधना करना है। आदित्यमुनिजी ने कहा कि संघ की पुण्यवानी स्वर्ण से भी ऊंची है। दस बोलो में से जिनवाणी सुनने का सातवां दुर्लभ बोल वर्षावास में मिला है। इसका पूरा पूरा लाभ उठाए। सभी तन्मत्या के साथ धर्म आदि आराधना में जुट जाए। श्रीसंघ ने श्रावक श्राविकाओं से वर्षावास में अभूतपूर्व आराधना करने का निवेदन किया है। संचालन अणु मित्र मंडल के वरिष्ठ मार्ग दर्शक राजेश कोठारी ने किया। श्रीसंघ द्वारा प्रभावना वितरित की गई।