रतलाम। राम महिमा महोत्सव चातुर्मास में आचार्य श्री रामलाल जी महाराज साहब आज्ञानुवर्ती शासन दीपक आदित्य मुनि जी महाराज साहब ने अपने प्रवचन में फरमाया की आत्मा अजर है अमर है अरुपी है आत्मा दिखती नहीं बहुत ही सूक्ष्म है पर कार्य बड़े-बड़े कराती है शरीर की साइज दिखने में बड़ी है परंतु मृत शरीर ना तो क्रिया कर सकता है ना कुछ महसूस कर सकता है शय्या संथारा पर लेटा शरीर अग्नि से भी झटपटाता नहीं क्योंकि उसमें आत्मा नहीं है अपितु जीवित शरीर मैं सूक्ष्म चुभन होने से भी शरीर को एहसास होता है उसका आत्मा से कनेक्शन है वह संबंध जुड़ा हुआ है जिस प्रकार मोबाइल का कनेक्शन भी 1000 किलोमीटर दूर होने के पश्चात जुड़ा होता है सांस का शरीर से जिस प्रकार का संबंध होता है उसी प्रकार इस अरुपी अदृश्य आत्मा का कनेक्शन जीवन से मृत्यु के मध्य शरीर से होता है गीता में भी लिखा है आत्मा को कोमल कर लो तो पुण्य अर्जन के योग बढ़ने लगेंगे आत्मा का कल्याण ही प्राणी मात्र का कल्याण है उपरोक्त जानकारी साधुमार्गी जैन श्रीसंघ के प्रीतेश गादिया ने देते हुए बताया कि म सा की निश्रा में कहीं भाई बहनों के तपस्या चल रही है इस अवसर पर संघ अध्यक्ष श्री सुदर्शन जी पीरोदिया ने युवाओं से आवान किया समता भवन में नोलाईपूरा पर चल रहे प्रवचन का लाभ लें व इस धर्म आराधना से जुड़े संचालन मंत्री दशरथ बाफना ने किया।