जीवन की हर समस्या का समाधान है आगम, सौभाग्यशाली है वह जो सुबह उठते ही करते इनका दर्शन – समकितमुनिजी

  • श्रावक-श्राविकाओं को संवत्सरी तक प्रतिदिन सुबह उठते ही आगम दर्शन का कराया प्रत्याख्यान
  • आदिनाथ स्थानक परिसर में गुरूवार को हुई आगम आराधना

पूना 6 जुलाई (निलेश कांठेड़)। आगम को नहीं जानने वाला न खुद को जान पाता है न दूसरों को समझ पाता है। तीर्थंकरों की स्तुति करने वाले आगम साधकों की आंख होते है। इस आराधना का लक्ष्य अपनी आंख को आगम की बनाना है। ऐसा करने वाला इतनें कर्मो की निर्जरा करते है जिनको क्षय करने में करोड़ो वर्ष लग जाते। जिस दिन आंख आगम वाली हो गई देखने का नजरिया ही बदल जाएगा और नजरिया बदला तो नजारे भी चेंज हो जाएंगे। आगम आराधना स्व-परकल्याण के लिए है। ये विचार श्रमणसंघीय सलाहकार सुमतिप्रकाश महारासा के सुशिष्य आगमज्ञाता प्रज्ञामहर्षि श्री डॉ. समकितमुनिजी म.सा. ने गुरूवार को पुण्यनगरी पूना के आदिनाथ सोसायटी जैन स्थानक भवन ट्रस्ट के तत्वावधान में आयोजित आगम आराधना एवं दैनिक प्रवचनमाला में व्यक्त किए। हर गुरूवार को होने वाले इस आयोजन के माध्यम से जीवन के हर कष्ट का निवारण करने वाली आगम गाथाओं का निचोड़ पेश किया जाएगा। आगम आराधना के शुरूआत में गुरूवार सुबह पारख परिवार की श्राविकाएं संत विश्राम स्थल से आगम ग्रंथ विधि पूर्वक प्रवचन स्थल तक लेकर पहुंची। पूज्य समकितमुनिजी म.सा. ने आगमों का महत्व बताते हुए कहा कि सौभाग्यशाली है वह जिन्हें सुबह उठते ही आगम के दर्शन होते है ओर आगमवाणी को अपनी आंखों से निहारते है। उन्होंने कहा कि हमारे पास स्वाध्याय के लिए समय नहीं पर सुबह उठते ही आगम के दर्शन तो कर सकते है। आगम हर घर में है सुबह उठते ही उसे खोलना है। आगम आराधना शुरू हो चुकी है हम चाहते है कि हर घर में आगम दर्शन आराधना शुरू हो। उन्होंने संवत्सरी तक सुबह उठते ही आगम दर्शन करने के प्रत्याख्यान कराते हुए कहा कि नियम बन जाए कि घर में सभी सदस्य सुबह उठते ही सबसे पहले आगम दर्शन करें। मुनिश्री ने कहा कि जीवन में कोई समस्याएं आए तो इधर-उधर कहीं जाने की जरूरत नहीं है हमारे आगम के अंदर हर समस्या का समाधान है। हमारी साधना इतनी परफेक्ट होनी चाहिए कि आगम खोले ओर समाधान मिल जाए। उन्होंने आने वाले दिनों में होने वाले कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए कहा कि सुबह प्रवचन के तहत जो भी कार्यक्रम होंगे वह सब ‘कहानी द्रोपदी की,कहानी कर्म की’ प्रवचनमाला के तहत ही होंगे भले उनका स्वरूप थोडा अलग हो जाए लेकिन थीम वहीं होगी कि पुण्य का क्या महत्व है, कैसे उसकी वृद्धि हो ओर उनका क्षय होने पर क्या परिणाम हो सकते है। धर्मसभा में गायन कुशल जयवंतमुनिजी म.सा. ने गीत ‘धरती पर रूप गुरूदेव का उस विधाता की पहचान है’ प्रस्तुत किया। धर्मसभा में पूज्य प्रेरणाकुशल भवान्तमुनिजी म.सा., सरलमना श्री विजयमुनिजी म.सा., सेवाभावी श्री भूषणमुनिजी म.सा. का भी सानिध्य प्राप्त हुआ। धर्मसभा में पूना के साथ विभिन्न स्थानों से आए श्रावक-श्राविकाएं मौजूद थे। संचालन आदिनाथ स्थानकवासी जैन भवन ट्रस्ट पूना के अध्यक्ष सचिन रमेशचन्द्र टाटीया ने किया। प्रवचन प्रतिदिन सुबह 8.45 से 9.45 बजे तक होगा।
उम्र होने पर अपने हाथों से बच्चों को सौंप दे विरासत
पूज्य समकितमुनिजी म.सा. ने कहा कि गुडलक के बिना जिंदगी गुड नहीं बन सकती। मन, वचन व काया के शुभयोग को शुभ रखना सबकुछ अच्छा होगा। उन्होंने मालिकाना हक प्रदान करने की चर्चा करते हुए कहा कि बाप छोड़ना नहीं चाहता ओर बेटा प्राप्त करना चाहता है इस कारण संघर्ष होता है। आजकल कोई मरने तक इन्तजार नहीं करना चाहता इसलिए बुर्जुगों को चाहिए कि उम्र की एक सीमा पार हो जाने पर स्वेच्छा से जितना अपना गुजारे के लिए जरूरत है उतना रख शेष अपने हाथों से बच्चों को सौंप दे। इससे वृद्धावस्था में बेहतर सारसंभाल होने के साथ जिंदगी चिंतामुक्त भी रहेगी।
खुद करना सीखे अपना काम
स्मकितमुनिजी ने कहा कि साधनों का न्यूनतम उपयोग करने के साथ हमे अपने कार्य करने के लिए दूसरों पर निर्भरता कम करनी होगी। हम खुद अपना काम जितना अधिक उतना ही परेशान कम होना पड़ेगा। घर की रसोई से लेकर देखभाल तक का कार्य खुद करे तो यह चिंता नहीं रहेगी कि आज कामवाली बाई नहीं आई तो क्या होगा। उन्होंने कहा कि पहले सब काम खुद करके भी स्वाध्याय-सामायिक के लिए समय मिल जाता था ओर आज सब काम दूसरों से करवा रहे फिर भी सामायिक करने के लिए समय नहीं होता है।
सुश्राविका मनीषा ने पूर्ण की चातुर्मास की पहली अठाई
धर्मसभा में सुश्राविका मनीषा सुशील मुथा ने नौ उपवास के प्रत्याख्यान लिए तो सभागार अनुमोदना के जयकारों से गूंज उठा। समकितमुनिजी ने चातुर्मास की पहली अठाई करने वाली सुश्राविका के प्रति मंगलकामना व्यक्त की। वैभवी दरड़ा व अरूणा सुराणा ने 6-6 उपवास के प्रत्याख्यान लिए। कई श्रावक-श्राविकाओं ने एकासन, आयबिंल, उपवास के प्रत्याख्यान भी लिए।
कलश आराधना के लिए पंजीयन जरूरी
समकितमुनिजी म.सा. ने कहा कि हमारे पुण्य का खजाना भरने का कार्य 8 से 25 जुलाई तक होने वाली 18 दिवसीय पुण्य कलश आराधना से होगा। जीवन में हर मोड़ पर खुशियां आपका स्वागत करे इस लक्ष्य से होने वाली इस आराधना के तहत एक दिन उपवास एवं एक दिन बिआसना की विधिपूर्वक आराधना होगी। इस आराधना में भाग लेने के इच्छुक श्रावक-श्राविकाओं को अपना पंजीयन शुक्रवार तक आदिनाथ संघ कार्यालय में कराना जरूरी है। हर शुक्रवार को एकासना तप होगा। आत्मकल्याण के लक्ष्य से सर्वोतभद्र चौमुखी जाप आयोजन भी प्रतिदिन रात 8.30 से 9.30 बजे तक हो रहा है। शनिवार एवं रविवार को दो दिवसीय विशेष प्रवचनमाला होगी। इसका विषय ‘‘क्या करें ऐसा कि प्रॉफिट (फायदा) हो जाए दोगुणा’’ रहेगा।
लोगस्स पाठ एवं संक्राति जाप 16 जुलाई को
समकितमुनिजी म.सा. ने बताया कि चातुर्मास में 16 जुलाई का दिन विशेष होगा। इस दिन संक्राति पर्व होने से संक्राति जाप होगा तो चतुर्दशी होने से लोगस्स का मांगलिक पाठ भी होगा। उन्होंने कहा कि सूर्य हर माह अपनी राशि बदलता है इस कारण वर्ष में 12 संक्राति होती है। जिस राशि में प्रवेश करता है उस राशि वालों पर विशेष प्रभाव पड़ता है। प्रत्येक संक्राति को विशेष जाप होगा। इसी तरह चातुर्मास में हर चतुर्दशी को लोगस्स पाठ के तहत पहली आराधना 16 जुलाई को होगी।