धर्म की ले शरण मौत का डर हो जाएगा कम -मुकेशमुनिजी म.सा.

  • हमेशा करते रहे पुण्य व धर्म की आराधना
  • वैशालीनगर स्थानक में चातुर्मासिक नियमित प्रवचन

अजमेर 6 जुलाई (निलेश कांठेड़)। जीवन का अंतिम सच मौत है जिसे कोई बदल नहीं सका है। जिसने सृष्टि पर जन्म लिया उसकी मौत तो होनी ही है पर मौत से पहले हम इस तरह जिनशासन ओर धर्म के आराधक बन जाए कि मौत का समय आए तो जन्म-जन्मांतर के बंधनों से मुक्ति पा जाए। ये विचार गुरूवार को अजमेर में श्री जैन श्वेताम्बर संस्था पार्श्वनाथ कॉलोनी, वैशालीनगर के तत्वावधान में आयोजित धर्मसभा में पूज्य दादा गुरूदेव मरूधर केसरी मिश्रीमलजी म.सा., लोकमान्य संत, शेरे राजस्थान, वरिष्ठ प्रवर्तक पूज्य गुरूदेव श्रीरूपचंदजी म.सा. के शिष्य, मरूधरा भूषण, शासन गौरव, प्रवर्तक पूज्य गुरूदेव श्री सुकन मुनिजी म.सा. के आज्ञानुवर्ती युवा तपस्वी श्री मुकेश मुनिजी म.सा ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि हमे मौत से डरने की बजाय उसका सामना करने के लिए सदा तैयार रहना चाहिए और पुण्य व धर्म के लिए समय आने का इन्तजार नहीं कर मौका मिलते ही इनकी आराधना में लग जाना चाहिए। हम जितना धर्म से जुड़ते जाएंगे मौत का डर हमे उतना ही कम होता जाएगा। धर्मसभा में सेवारत्न श्री हरीश मुनिजी म.सा. ने जैन रामायण का वाचन करते हुए बताया कि किस तरह किष्कंधा नगरी बसाई गई ओर उसका ये नाम क्यों पड़ा। उन्होंने कहा कि जैन रामायण एक सामान्य ग्रंथ नहीं होकर जीवन जीने की सीख देने वाला महाग्रंथ है। इस ग्रंथ में ऐसी-ऐसी गाथाएं बताई गई है जिनसे प्रेरणा लेकर हम अपने जीवन को पूरी तरह बदल आत्मकल्याण के पथ पर ले जा सकते है। मधुर व्याख्यानी श्री हितेश मुनिजी म.सा. ने धर्मसभा में जैन दर्शन के आधार 32 आगमों में से एक सुखविपाक सूत्र का वाचन करते हुए कहा कि व्यक्ति दो प्रकार के स्वप्न देखता है एक सपना खुली आंख से तो दूसरा बंद आंख से देता जाता है। खुली आंख से जो सपना देखा जाता है वह संसार का चलचित्र होता है ओर बंद आंख से जो सपना देखते है वह नींद में आता है। आंखें जब तक खुली है तब तक सब अपना है उसके बाद तो संसार भी एक सपना है। इसलिए सपनों की दुनिया में जीने से बचना चाहिए और ससार सागर छोड़ने पर पुण्य की पोटली भरी हो यह प्रयास रहना चाहिए। प्राथनार्थी सचिन मुनिजी म.सा. ने कहा कि जीवन में बहुत सोच समझकर बोलना चाहिए। कई बार एक शब्द ऐसी चोट करता है जो रिश्ते बदल कर रख देता है। शब्द की चोट लगने से जीवन बर्बाद भी हो सकता ओर कई बार कायाकल्प भी हो सकता। इसलिए शब्द बोलते समय परिणाम अवश्य सोच लेना चाहिए। धर्मसभा में युवा रत्न श्री नानेश मुनिजी म.सा. का भी सानिध्य मिला। धर्मसभा में कई श्रावक-श्राविकाओं ने उपवास, एकासन, आयम्बिल आदि के प्रत्याख्यान भी लिए। धर्मसभा का संचालन एवं अतिथियों का स्वागत श्रीसंघ के सचिव डॉ. पीएम जैन (डोसी) ने किया। नियमित प्रवचन सुबह 9 से 10 बजे तक होंगे।
हर रविवार सुबह प्रवचन से पहले होगा जाप
चातुर्मासकाल में प्रत्येक रविवार को सुबह 9 से 9.30 बजे तक अलग-अलग तरह का जाप होगा। इस रविवार को सर्वकल्याण की कामना से नवकार महामंत्र का जाप होगा। प्रवचन सुबह 9.30 से 10.30 बजे तक होंगे। रविवार को दोपहर 2 से 3 बजे तक धार्मिक प्रतियोगिता का आयोजन होगा। प्रतिदिन सुबह सूर्योदय के समय प्रार्थना एवं दोपहर 3 से 4 बजे तक धर्मचर्चा हो रही है। धर्मचर्चा के माध्यम से कोई भी श्रावक-श्राविकाएं मुनिवृन्द से अपने मन की जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त कर सकता है। सूर्यास्त के समय प्रतिक्रमण के बाद रात्रि धर्म चर्चा का आयोजन भी हो रहा है।