

रतलाम, 14 जुलाई। जब तक किसी चीज से राग रखोगे तब तक मोक्ष नहीं मिलेगा। प्रभु को पाने के लिए सब कुछ छोड़ना पड़ता है लेकिन मोक्ष को पाना है तो प्रभु को भी छोड़ना पडे़गा। यह वचन आचार्य श्री विजय कुलबोधि सूरीश्वरजी म.सा. ने सैलाना वालों की हवेली मोहन टाॅकीज में प्रवचन में कहे। उन्होने सभी को राग से दूर रहने का संकल्प दिलाया।
आचार्य श्री ने कहा कि सारे कर्म की फिलोसाॅफी राग और द्वेष से पैदा होती है। राग ही द्वेष में बदलता है। राग हमारे मन के फूल के बाग को जला देता है। इसी लिए राग को शेर और द्वेष को हाथी कहा गया है। राग के शेर को कंट्रोल में करना मुश्किल है। द्वेष के हाथी को किया जा सकता है। सारे धर्म शास्त्र में द्वेष को खतरनाक बताया है और उसे छोड़ने के लिए प्रेरणा दी गई है लेकिन प्रभु ने द्वेष से भी खतरनाक राग को बताया है।
आचार्य श्री ने कहा कि संयम का एक नियम है। वस्त्र परिवर्तन नहीं, मन को बदलना पडे़गा। जो धर्म परिवर्तन नहीं करता, वह धर्म खत्म हो जाता है। राग करते समय सावधान रहना, नहीं तो द्वेष होगा। द्वेष घर की शांति को खत्म कर देता है। वैराग्य जैसे-जैसे बढ़ता है, विद्वंता में बदलता है। प्रवचन के दौरान श्री देवसूर तपागच्छ चारथुई जैन श्रीसंघ गुजराती उपाश्रय, श्री ऋषभदेवजी केशरीमलजी जैन श्वेताम्बर तीर्थ पेढ़ी रतलाम के सदस्य एवं बढ़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहे।
रविवार से होगी पांच युवा शिविरों की शुरूआत
श्री देवसूर तपागच्छ चारथुई जैन श्रीसंघ गुजराती उपाश्रय, श्री ऋषभदेवजी केशरीमलजी जैन श्वेताम्बर तीर्थ पेढ़ी के तत्वावधान में 16 जुलाई से प्रति रविवार पांच युवा शिविर का आयोजन किया जाएगा। आचार्य श्री विजय कुलबोधि सूरीश्वरजी म.सा. की निश्रा में होने वाले इन सभी शिविरों के लाभार्थी विधायक श्री चेतन्य काश्यप एवं परिवार रहेगा। शिविर प्रातः 9.30 से 12.30 बजे रहेगा। शिविर में 15 से 55 वर्ष के भाई-बहन शामिल होंगे। शिविर के पश्चात साधार्मिक भक्ति का आयोजन किया जाएगा। श्री संघ अध्यक्ष अभय लुनिया ने बताया कि प्रथम शिविर का शुभारंभ विधायक श्री चेतन्य काश्यप दीप प्रवज्जवलित कर करेंगे। उन्होने युवाओं से अधिक से अधिक उपस्थित रहने का आव्हान किया है।