रतलाम। प्रत्येक मनुष्य में गुण एंव अवगुण होते है, अवगुणों की वजह से व्यक्ति की संसार में निंदा होती है और गुणों की वजह से प्रशंसा । गुणों का प्रवेश जैसे जैसे मनुष्य के भीतर होता है, वैसे वैसे उसकी आत्मा का विकास होता है।
गौतम स्वामी ने प्रभु महावीर से प्रश्न किया की मनुष्य के जीवन में बुद्धि स्वच्छ एंव निर्मल किस प्रकार बन सकती है । प्रभु ने फरमाया की बुद्धि की निर्मलता मनुष्य की विनम्रता की वजह से बढ़ती है।
विनयवान मनुष्य संसार में बहुत कुछ प्राप्त कर सकता है। फलदार वृक्ष फल आने पर झुक जाते है, और जो पेड़ झुकते नही है वो आँधी तूफान में उखड़ जाते है। वैसे ही जब मनुष्य के जीवन में धन ऐश्वर्य व लक्ष्मी की वृद्धि होती है उस वक्त यदि उस व्यक्ति में विनम्रता भी बढ़ जाए तो वह घर परिवार समाज एंव संसार में बहुत ऊँचा स्थान प्राप्त करता है, लेकिन यदि संपत्ति बढ़ने पर अहंकार बढ़ जाए, तो वह व्यक्ति सम्माननीय नही बन पाएगा।
कर्नाटक में जैन सन्त की निर्ममतम/जघन्य हत्या के विरोध में दिनाँक 20 जुलाई को प्रातः 11 बजे सकल जैन समाज द्वारा दोषियों पर कड़ी कार्यवाही एंव सन्तो को समुचित सुरक्षा प्रदान करने की माँग को लेकर मौन जुलूस दो बत्ती चौराहे से निकाला जाएगा। इस हेतु धर्मसभा में दिगम्बर जैन समाज के प्रतिनिधि मंडल ने प्रवचन सभा में पँहुच कर महाराज श्री से आशीर्वाद प्राप्त किया एवं श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ से मौन जुलूस में शत प्रतिशत सहभागिता का आव्हान किया।