जितनी आस्था, श्रद्धा, भरोसा हम दूसरों पर रखते है, उतनी प्रभु पर रखेंगे तो कभी कष्ट और परेशानी नहीं होगी

  • आचार्य श्री विजय कुलबोधि सूरीश्वरजी म.सा. ने दूसरे युवा शिविर में कहा
  • 2500 से अधिक युवाओं के हदय परिर्वतन का प्रयास

रतलाम, 23 जुलाई। जितनी आस्था, श्रद्धा, भरोसा हम दूसरों पर रखते है, उतनी प्रभु पर रखेंगे तो कभी कष्ट और परेशानी नहीं होगी। पत्थर से कभी प्रतिमा नहीं बनती, वह तो उसमें ही रहती है। शिल्पकार उसके बेकार हिस्से को जब माइनस करता है, तब उसका स्वरूप नजर आता है। वैसे ही मृत्यु के बाद स्वर्ग की बात मत करो, जीते जी स्वर्ग मिलना चाहिए। हेवन इज हियर (स्वर्ग यहीं है), उसके लिए अपने अंदर से पांच चीजों को माइनस करना पडे़गा- एंड लेस नीड्स, हार्ट लेस फिलिंग, फूटलेस रिलेशन, काउंटलेस मिस्टके और केयर लेस एटिट्यूट को माइनस करना है।
यह विचार आचार्य श्री विजय कुलबोधि सूरीश्वरजी म.सा. ने सैलाना वालों की हवेली मोहन टाॅकीज में रविवार को परिर्वतन का शंखनाद के दूसरे युवा शिविर में कहे। आचार्य श्री ने कहा कि आध्यात्म जगत में कुछ पैदा नहीं करना, सिर्फ प्रकट करना है। हमारे पास इच्छा तो है लेकिन उसका पूर्ण विराम नहीं है। एंड भी दो तरह के एक “और” तो दूसरा “अंत “। गंगा नदी, पर्वत और समुद्र का किनारा है, अंत है लेकिन हमारी इच्छाओं का कोई किनारा, सतह और अंत नहीं है। शरीर आवश्यकताओं की मांग करता है लेकिन मन आकांक्षा मांगता है। हम इसलिए दुखी है क्योकि जो लग्जरी है, वह नेसेसरी हो गया है।
आचार्य श्री ने कहा कि 84 योनियों में एकमात्र मानव ही धन कमाता है। अन्य कोई जीव भूखा नहीं भरा लेकिन मानव का पेट नहीं भरा। प्रभु कहते है आप इच्छा करो उसका विरोध नहीं है लेकिन जिस प्रकार हम लेटर पर टू और फाॅर्म लिखते है, उसी प्रकार से इच्छा के आगे भी यह लगाना चाहिए कि मिले तो ठीक और इच्छा पूरी न हो तब भी कोई दुख नहीं।
आचार्य श्री ने कहा कि 21वीं सदी में प्लस चाहे जितने हुए हो लेकिन एक माइनस भी हुआ है। आज फिलिंग्स तो है लेकिन सब हार्टलेस है। हम सवेदनाहीन हो गए है। पहले हम किसी को स्टेशन छोड़ने जाते थे, तो आंख से आंसू आ जाते थे, आज मुक्तिधाम जाते है तब भी आंसू नहीं आते है। जो देश ऋषि और कृषि प्रधान है, वहां ऋषि और संत की हत्या संस्कृति की हत्या है। ये एक सिक्के के दो पहलू है। हम ताड़ जैसे हो गए, हमारी बरगद की भूमिका खत्म हो गई। मशीन युग में हमारी मर्मता खत्म हो गई है। हमारी समृद्धि बढ़ गई लेकिन मानवीयता की गहराई खत्म हो गई।
आचार्य श्री ने युवाओं से कहा कि कहीं भी पढ़ने जाओ तो एक दिल को राजी रखने के लिए दो दिल को नाराज मत करना। उन्होने कहा कि आज संबंधों में आत्मीयता खत्म हो गई है। पति-पत्नी, सास-बहू, पिता-पुत्र के बीच संबंधों की दूरी बढ़ने लगी हैं। जिस घर में तीन पीढ़ी साथ में भोजन करे, स्वर्ग वहीं है। उन्होने एडजस्ट एवरी वेअर को संबंधों को बनाए रखने का सूत्र बताते हुए कहा कि हमे पानी जैसा होना है, जिस पात्र में जैसे वैसे ढल जाए, पत्थर नहीं बनना है।
आचार्य श्री ने कहा कि हम जीवन में लगातार गलती करते है। गलती इंसान से होती , भगवान से नहीं। यदि हमसे भूल हुई है तो सुनने की क्षमता रखो, उसे स्वीकार करो और सुधारने की कोशिश करो। महानता भूल को स्वीकार कर उसे सुधारने में है। उन्होने कहा कि हर व्यक्ति का किसी भी चीज को देखने का नजरीया अलग होता है। पाॅजिटिव भी होता है और नेगेटिव भी। हमे अपना नजरीया पाॅजिटिव रखना है। हमें जीवन में सकारात्मकता का मंत्र अपनाना है। दो मिनट मुस्कुराने से फोटो अच्छा आता है, तो रोज मुस्कुराओंगे तो जिंदगी बदल जाएगी।
श्री देवसूर तपागच्छ चारथुई जैन श्रीसंघ गुजराती उपाश्रय, श्री ऋषभदेवजी केशरीमलजी जैन श्वेताम्बर तीर्थ पेढ़ी द्वारा के तत्वावधान में आयोजित इस शिविर में 2500 से अधिक युवा एवं श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहे। शिविर के लाभार्थी विधायक चेतन्य काश्यप एवं परिवार रहा। शिविर के आरंभ में मुंबई बोरीवली के संगीतकार जैनम ने सुमधुर भजनों की प्रस्तुतियां दी गई।