सीढ़ी तन को ऊपर उठाती, संपत्ति इमेज को और सद्गुण आत्मा का ऊपर उठाते है – आचार्य श्री विजय कुलबोधि सूरीश्वरजी म.सा.

सैलाना वालों की हवेली मोहन टाकीज में प्रवचन

रतलाम, 28 जुलाई। भावना से समृद्धि मिले न मिले लेकिन शुद्धि अवश्य मिलती है। जो मिला है, पाया है और आया है, वह छूटेगा अवश्य। पात्र, पदार्थ और परिस्थिति कायम नहीं रहते है। संसार का सुख कलंक है। सुख के तीन गुण कभी शाश्वत, स्वाधीन और स्वच्छ नहीं होता है।
यह विचार आचार्य श्री विजय कुलबोधि सूरीश्वरजी म.सा. ने सैलाना वालों की हवेली मोहन टॉकीज में शुक्रवार के प्रवचन में कही। उन्होने कहा कि सुख हमें समृद्ध और गुण शुद्ध बनाता है। हमारे मन में सुख या गुण का आर्कषण होता है। लेकिन यह नहीं भूलना चाहिए कि सीढ़ी तन को ऊपर उठाती है, संपत्ति इमेज को और सद्गुण हमारी आत्मा को ऊपर उठाते है। बिना गुण का सुख हमारे लिए आपत्ति का आमंत्रण बन जाता है। गुण विहीन सुख दुर्गति तक पहुंचाता है।
आचार्य श्री ने कहा कि संपत्ति में अगर उदारता होगी, तो सुख है। इसलिए आप सुख के साथ गुण देना सीखो। सुख शाश्वत नहीं होता है। उसकी भी डेडलाइन है। लंबे समय तक सुख टिकता नहीं और शायद टीके तो सुख का अनुभव नहीं होता। जो सुख है, वह स्वाधीन नहीं है। आप पराधीन है। ईश्वर कहता है कि सब कुछ तुम्हारा है लेकिन हुकुम हमारा है। तुम मालिक नहीं गुलाम हो। इस जगत के सारे सुख पराधीन है। कर्म सत्ता को कहो हमे सुख नहीं अनंत ज्ञान दें।
आचार्य श्री ने कहा कि सुख स्वच्छ नहीं है। सब कुछ अनुकूल है लेकिन कुछ न कुछ तो प्रतिकूल चलता रहेगा। संसार का सुख स्वाधीन नहीं हैं। शाश्वत नहीं है और अगर शाश्वत और स्वाधीन हो भी जाए तो भी वह स्वच्छ नहीं है। 99 सुख मिलेंगे लेकिन एक दुख ऐसा मिलेगा जो सभी सुख को मिटा देगा। संसार के सुख के तीन कलंक है। इस अनित्यता का बोध हो जाए तो किसी भी चीज के प्रति राग नहीं होगा।
तीसरा युवा शिविर 30 जुलाई, रविवार को होगा
आचार्य श्री विजय कुलबोधि सूरीश्वरजी म.सा. की निश्रा में मोहन टाकीज में 30 जुलाई, रविवार को तीसरा युवा शिविर आयोजित होगा। शिविर का विषय जर्नी आफ जाय रहेगा। श्री देवसूर तपागच्छ चारथुई जैन श्रीसंघ गुजराती उपाश्रय, श्री ऋषभदेवजी केशरीमलजी जैन श्वेताम्बर तीर्थ पेढ़ी के पदाधिकारियों ने अधिक से अधिक संख्या में युवाओं को शिविर में उपस्थित रहने का आव्हान किया है। शिविर के लाभार्थी विधायक चेतन्य काश्यप एवं परिवार रहेगा।