जय-जयकार कर की अनुमोदना
रतलाम, 31 जुलाई। परम पूज्य, प्रज्ञा निधि, युगपुरूष, आचार्य प्रवर 1008 श्री विजयराजजी मसा की पावन निश्रा में अभ्युदय चातुर्मास के दौरान सोमवार को चारित्र आत्माओं के तीसरे मासक्षमण तप का प्रसंग आया। विद्यावाग्नी महासती श्री गुप्तिजी मसा ने मासक्षमण का दीर्घ तप किया। सिलावटों का वास स्थित नवकार भवन उनकी अनुमोदना में जय-जयकार से गूंज उठा। आचार्य श्री ने अनुमोदना करते हुए कहा कि विश्वास की नाव समुद्र भी पार करा देती है। महासतीजी ने इसी विश्वास की डोर पकडकर कठोर तप आराधना की है।
आचार्यश्री के अनुसार महापुरूष फरमाते है कि कामयाबी को हमेशा चार विशेषताएं समय, साहस, विश्वास और कर्मठता चाहिए होती है। समय अनुकुल नहीं होता, तब तक कामयाबी नहीं मिलती है। समय यदि अच्छा भी हो और यदि साहस नहीं होता है, तो सफलता नहीं मिलती है। साहस जब जागता है, तभी विश्वास पैदा होता है और विश्वास हो, तो प्रतिकुल समय भी अनुकुल बन जाता है। उन्होंने कहा कि यदि समय, साहस और विश्वास सभी हो, लेकिन कर्मठता नहीं होती, तो बडी कामयाबी नहीं मिलेगी। महासती श्री गुप्तीश्रीजी ने कर्मठता के साथ मासक्षमण की दीर्घ तप पूरा किया है। उनकी जितनी अनुमोदना की जाए, उतनी कम होगी। इनसे पूर्व तरूण तपस्वी श्री युगप्रभजी मसा और सेवानिष्ठ, एकान्तर तप के तपस्वी श्री जयमंगल मुनिजी मसा ने मासक्षमण की तपस्या पूर्ण की है। तपस्विनी, सेवागुण संपन्न महासती श्री निरूपणाश्री मसा के 21 उपवास की तपस्या चल रही है। इन तपस्वी आत्माओं को जितना गुणगान करो, उतना कम है।
आचार्यश्री ने कहा कि जिसे कामयाबी की कामना होती है, वह केवल विश्वास ही करता है। विश्वास से संबल लेता है, विश्वास की नांव पर बैठता है, क्योंकि वह जानता है कि ये नाव उसे समुद्र भी पार करा सकती है। संसार में एवरेस्ट की चोटी चढना आसान है, लेकिन मासक्षमण की तपस्या करना कठिन है। व्यक्ति एक दिन भी भूखा नहीं रह सकता। ऐसे वातावरण में मासक्षमण का दीर्घ तपस्या करने वाले महापुरूष और महासतीजी धन्य है।
आरंभ में उपाध्याय प्रवर, प्रज्ञारत्न श्री जितेश मुनिजी मसा ने आचारण सूत्र का वाचन करते हुए तप अनुमोदना की। महासती श्री इन्दुप्रभाश्री जी मसा, श्री मोहकश्रीजी मसा ने भाव व्यक्त किए। महासती श्री ख्यातिश्रीजी मसा एवं श्री चिन्तनश्रीजी मसा ने स्तवन प्रस्तुत कर तप अनुमोदना की। इस दौरान बडी संख्या में श्रावक-श्राविकागण उपस्थित रहे।