साक्षात महाविदेह क्षेत्र में आये एसी अनुभूति कराता महाविदेह भावयात्रा कार्यक्रम सम्पन्न हुआ

तलेगांव (पुणे) । परोपकार सम्राट मोहनखेड़ा तीर्थ विकास प्रेरक जैनाचार्य श्रीमद्विजय ऋषभचंद्र सूरीश्वरजी म.सा.के आज्ञानुवर्ती सुशिष्य वरिष्ठ मुनिप्रवर श्री पीयूषचंद्र विजयजी म.सा.मुनिराज श्री रजतचंद्र विजयजी म.सा.मुनिश्री प्रीतियश विजयजी म.सा.का परमपथ चातुर्मास पर्व-23 तलेगांव दाभाडे नगर में विक्रम सर्जक संख्या में ज्ञान ध्यान तपाराधना के साथ धुमधाम से चल रहा है।
आज रविवार स्पेशल कार्यक्रम में महाविदेह क्षेत्र की भावयात्रा का दिव्यतम आयोजन तलेगांव की धरती पर सर्वप्रथम बार किया गया। इसकी सफलता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि प्रातः 08:15 बजे से शुरू हुआ कार्यक्रम दोप.01बजे तक धारा प्रवाह चलता रहा। श्रद्धालुंओं से प्रवचन मंडप खचाखच भरा हुआ था। मुनिराज श्री रजतचंद्र विजयजी म.सा.की सुमधुर स्वर लहरि प्रस्तुति में श्रद्धालुजन मंत्र मुग्ध हो एकतान बने रहे। संगीतमय आयोजन में तलेगांव से महाविदेह क्षेत्र तक रोमांचभरा सफर साथ में भक्ति पदावली की मिठास ने सभी का मनमोह लिया। लाभार्थी गणेशजी राठोर परिवार की और से सभी को साथ में बोलने का गीत स्तुति आदि का विशेष फोल्डर कार्ड दिया गया जिससें श्रावक श्राविका कार्यक्रम के अंत तक कनेक्ट रहे। यात्रा में आने वाले नदी पर्वत शिखर शाश्वत चैत्य आदि की अलौकिक कोमेंट्री से लोग अभिभूत हो झूमते रहे। पी.पी.जी.ग्रुप द्वारा अद्भुत पर्वत श्रृंखला की रचना एवं राठोर परिवार के पींकी बेन के नेतृत्व में आकर्षक रंगोली ने सभी को मोहित किया। भावयात्रा में एक एक वर्णन को प्रभावी ढंग से मुनिवर ने समझया। पंचम वर्षीतप तपस्वी ‌श्री पीयूषचंद्र विजयजी म.सा.ने तीर्थंकर देशना का प्रवचन फरमाया। परिवार की लाडली ध्रुवी गणेशजी राठोर ने सुंदरसा प्रभु भक्ति नृत्य एवं कार्यक्रम की विशेषता का वर्णन किया।
इस आयोजन में सोने में सुगंध जैसा माहोल 15 भाग्यशाली द्वारा बनाये गये आकर्षण जिन मंदिर थे । मुंबई से आये सिंगर भरत ओसवाल ने भक्ति की धूम मचाई। अंत में लक्की ड्रा सघं पूजन प्रभावना एवं स्वामीभक्ति का आयोजन कार्यक्रम के लाभार्थी केसरीमलजी भगवानजी पुखराजजी राठोर परिवार द्वारा किया गया । कार्यक्रम के प्रारंभ में प्रभुजी की संगीतमय सुंदर गंहूली एवं अंत में अष्टप्रकारी पूजा व आरती की गई। चैत्यवंदन व क्षमा क्रिया से अनुष्ठान का समापनम किया गया। परमपथ चातुर्मास में आज रतलाम से पधारे प्रदीपजी लोढ़ा राजमलजी मोदी ,राजेंद्रजी पीतलीया मुकेशजी चोरड़िया 15 सदस्यों की टीम के साथ पधारे। सभी का बहुमन लाभार्थी रविन्द्र कुमारजी सोलंकी परिवार ने किया। सामूहिक सिद्धतप प्रभावना एवं बच्चों के गीफ्ट के लिए रतलाम से पधारे गुरु भक्त द्वारा लाभ लिया गया।

महाविदेह क्षेत्र की कुछ महत्वपूर्ण विशेषता

  • जहां महाप्रभु दादा सीमांधर स्वामी स्वदेह विचरण कर रहे हैं।
  • जहां सदा सर्वदा चौथा आरा ही प्रवृतमान रहता हैं।
  • जहां देव रचित समवसरण में प्रभु कल्याणकारी देशना फरमाते हैंं।
  • जहां 20 विहरमान प्रभु के 1680 गणधर भगवत हैं।
  • जहां 20‌ विहरमान प्रभु के साथ 2 करोड़ केवलज्ञानी हैं।
  • जहां 20 विहरमान प्रभु के साथ 20 अरब साधु-साध्वी हैं।
  • जहां 20 विहरमान प्रभु की पर्षदा में 360 अरब श्रावक- श्राविका हैं।
  • जहां 20 विहरमान प्रभु की सेवा में करोड़ों देव देवीयां उपस्थित हैं।
  • जहां 1660 तीर्थंकर सभी गृहस्थावास एवं 20 तीर्थकर के रुप में विघमान हैं।
  • यह साम्राज्य स्थिति एक ही स्थान की नहीं किंतु पांचो महाविदेह क्षेत्र की संयुक्त स्थिति हैं।