रतलाम । आचार्य श्री रामलाल जी महाराज साहब के आज्ञानूवर्ती आदित्य मुनि म सा ने प्रवचन में फरमाया की एक बार चिंतन करें कि हम किस कार्य में लगे हुए हैं मनन करें कि हम एक भी कार्य को परफेक्ट कर रहे हैं क्या । अगर हमारी पुनवानी में कमी होती है तो वह हमें सार्थक कार्य करने से रोकती है और हमारा समय व्यतीत होता जाता है हम निरर्थकता कि और बढ़ते हे। शिक्षा संस्कार परिवार व्यापार खेल नौकरी धर्म अभी कोई सा भी स्थान है जहां पर हम प्रयत्नशील हैं पुरुषार्थ कर रहे हैं तो हमें चिंतन करना चाहिए उसमें सफल सोच के साथ यह कार्य कर रहे हैं या सिर्फ उसे टालने के लिए पूरा करने के लिए बोझ बना कर वह कार्य कर रहे हैं । परमात्मा की भक्ति भी करते हैं तो एक चित्त होकर शुद्ध मन से कर रहे हैं क्या नहीं तो 24 घंटे बैठने में भी उसका असर नहीं दिखेगा जो मात्र 48 मिनट की शुद्ध सामायिक में दिख सकता है यह हमारी पुनवानी का उदय ही मान लो की परमात्मा की भक्ति के पश्चात सार्थक कार्य करने में हमारा मन लगता है अपितु निरर्थक कार्यों में हमारा मन नहीं लगता तो हम सच में भी सार्थकता की ओर है अन्य कई उदाहरण श्लोक के माध्यम से चरित्र आत्माओं ने समझाएं।उपरोक्त जानकारी देते हुए साधुमार्गी जैन संघ के प्रीतेश गादिया ने बताया कि इस अवसर पर सभा का संचालन अध्यक्ष सुदर्शन पिरोदिया ने किया व भीलवाड़ा दिल्ली निम्बाहेड़ा आदि स्थानों से पधारे दर्शनार्थी का भी शाब्दिक स्वागत संघ द्वारा सभा में किया गया।