
रतलाम, 4 अगस्त। साधना कभी खाली नहीं जाती। वह बिगड़ जाए तो भी साधारण नहीं होती। संस्कार अकेले काफी नहीं होते, हमें साधना भी करना होती है। हमे यह जन्म क्रांति के लिए मिला है। द्रव्य, क्षेत्र और काल बिगड़ भी जाए तो भावना और भव बिगड़ना नहीं चाहिए।
यह बात सैलाना वालों की हवेली मोहन टाकीज में आचार्य श्री विजय कुलबोधि सूरीश्वरजी म.सा के शिष्य मुनिराज ज्ञानबोधी विजयजी म.सा. ने कही। उन्होने कहा कि जिस तरह द्रव्य का, क्षेत्र का और काल का प्रभाव होता है, उसी तरह भाव का प्रभाव होता है। हम संसारी कुमदी जैसे है। आठ कर्मों के लेप लगे है लेकिन जैसे जैसे प्रभु से जुड़ते जाएंगे, वैसे-वैसे, एक-एक लेप हटता जाएगा और जीव की उतयंति होगी।
मुनिराज ने कहा कि प्रभु का प्रभाव पड़ जाए तो पुरूषार्थ से पुण्य मिल जाएगा। भाव का अर्थ मन का परिणाम है। एक व्यक्ति के मन के भाव आस-पास के 16 लोगों को प्रभावित करते है। मन के अशुभ परिणाम दूसरों पर होते है। मन के भावों का प्रभाव व्यक्ति के साथ वनस्पति पर भी होता है। आशीर्वाद और बद दुआओं दोनों तत्वों में श्रद्धा रखो। प्रभु असीम शक्ति के मालिक है। नास्तिक को पुरुषार्थ, आस्तिक को पुण्य मिलता है और ये धार्मिक प्रभाव से होता है।
श्री देवसूर तपागच्छ चारथुई जैन श्रीसंघ गुजराती उपाश्रय, श्री ऋषभदेवजी केशरीमलजी जैन श्वेताम्बर तीर्थ पेढ़ी के तत्वावधान में आयोजित प्रवचन में श्री संघ के पदाधिकारियों सहित बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहे।
चौथा युवा शिविर 6 अगस्त, रविवार को होगा
श्री संघ अध्यक्ष अभय लुनिया ने बताया कि आचार्य श्री विजय कुलबोधि सूरीश्वरजी म.सा. की निश्रा में 6 अगस्त, रविवार को सैलाना वालों की हवेली मोहन टॉकीज में चौथा युवा शिविर ” ऑल इज वेल ” विषय पर होगा। शिविर के लाभार्थी विधायक चेतन्य काश्यप एवं परिवार रहेगा। श्री संघ ने श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में शिविर उपस्थित रहने का आह्वान किया है।