अंगदान दिवस पर सृजन महाविद्यालय में हुआ अंगदान जागरूक कार्यक्रम

रतलाम । समय-समय पर हिन्दू गंथों के माध्यमों से यह जानकारी प्राप्त होती रही है कि अंगदान भारतीय संस्कृति का एक हिस्सा रहा है। ऐसा एक किस्सा महान ऋषि दधिचि का शास्त्रों से मालूम होता है जिसमें उन्होंने अपनी हड्डियों का दान देवताओं को शस्त्र बनाने के लिए किया जिससे असूरों का नाश हो सके। इसी तरह महान दयालु राजा शिवि की कहानी जिन्होनें एक कबूतर कि जान बाज से बचाने के लिए अपने शरीर का मास उस बाज को दे दिया। ये कहानियाँ सृजन महाविद्यालय में आयोजित अंगदान जागरूक कार्यक्रम मंे स्वामी आत्मानंद जी (डाण्डी महाराज) द्वारा कही गई। कार्यक्रम में डाॅ गिरिश गौड द्वारा विद्यार्थीयों को विशिष्ट रूप से स्वस्थ रहने के लिए कई उपाय बताये व समय-समय पर रक्तदान करने हेतू प्रेरित किया व अंगदान करने के लिए आज से ही मानसिक रूप से तैयार होने के लिए कहा। कार्यक्रम का सारांश सृजन महाविद्यालय के चेयरमेन व समाजसेवी अनिल झालानी ने अपनी माताजी के नेत्रदान का उल्लेख कर विद्यार्थियों को बताया व अंगदान के विषय पर स्वयं विचार करने के लिए विद्यार्थीयों को सलाह दी जिसमें उन्होंने इस विषय पर खूद के लिए भी चिंतन जोड़ा व आगे चलकर एक सकारात्मक निर्णय लेने का प्रण लिया। कार्यक्रम मुस्कान गुप्र व सेवा संस्थान के तत्वाधान मे हुआ कार्यक्रम का संचालन निसर्ग दुबे द्वारा किया गया।