श्रीमद् भागवत कथा में भगवान श्री कृष्ण का जन्मोत्सव हर्षोल्लास पूर्वक मनाया गया

रतलाम। सत्य बोलना भी ईश्वरी की भक्ति है सत्य बोलने, मीठा बोलने वाले ईश्वर हमेशा प्रसन्न होते है तथा मन में शांति बनी रहती है । इसलिए इंसान को हमेशा सत्य बोलना चाहिए एवं प्रसन्न रहना चाहिए। उक्त बात भगवताचार्य पं. योगेश्वर शास्त्री ने (संस्थापक साकेतधाम) ने श्री मेढ़ क्षत्रीय मारवाड़ी स्वर्णकार समाज द्वारा आयोजित भागवत कथा में कहीं ।
श्री शेषनारायण मंदिर भरावा की कुई पर आयोजित भागवत कथा में आज श्रीकृष्ण जन्म वर्णन, वामन अवतार वर्णन एवं माँ गंगा के प्राकट्य उत्सव का वर्णन किया गया। पंडित शास्त्री जी ने बकाया कि जो कि गर्भ रहकर जन्म लेता उसे जन्म कहते है लेकिन जो गर्भ में नहीं रहते हुए जन्म ले तो उसे अवतरण (अवतार) कहते है। आज कथा में जैसे श्रीकृष्ण जन्म का वर्णन हुआ । पुरा पांडाल श्रीकृष्ण भगवान के जयकारों से गूंज उठा। महिलाएं, नृत्य करने लगी, भक्ति भजनों, गोविन्दा आला रे- गोविन्दा आला रे जरा मटकी संभाल ब्रजबाला, थाली भरके लाईरे खिचड़ों, ऊपर घी की धार आज जिमाओ तुम्हें खिचड़ो, कान्हा जिमो म्हारा जिमावे आपकी दासी रे जैसे भजनों की गूंज से वातावतरण भक्तिमयहो गया ।
इस अवसर पर संस्थापक अध्यक्ष नवनीत सोनी, जयदिप भामा, संजय अग्रोहा, जगदीश भामा, संजय अग्रोया, राजकुमार बेवाल, शैलेष जलोतिया, गंगाधर जांगलवा, रमेश सोनी, संजय सोलीवाल, मुकेश जलोदिया, राजेश भामा, मोतीलाल मींडिया, मुकेश अग्रोया, तेजकरण सोलीवाल, भुपेन्द्र मंडावरा, श्यामसुंदर सदेवड़ा, राजेन्द्र अग्रोया आदि न्यास पदाधिकारियों एवं सदस्यगण सहित बड़ी संख्या में धर्मालुजन उपस्थित थे ।