जिनवाणी सुनकर स्मॉर्ट बना लो जिंदगी वरना कुछ नहीं कर पाएंगे स्मॉर्ट घड़ी ओर स्मॉर्ट फोन-समकितमुनिजी

  • पिघलने से पहले आइसक्रीम नहीं मोमबत्ती की तरह बना लो जिंदगी पता नहीं कब यमराज आ जाए
  • आदिनाथ सोसायटी के पारख धर्मसभा मण्डप में कल मनाया जाएगा दादा-दादी दिवस

पूना, 5 अगस्त। हाथ में स्मॉर्ट घड़ी बांधने ओर स्मॉर्ट फोन रखने से जिंदगी स्मॉर्ट नहीं बनने वाली है। जिंदगी तो स्मॉर्ट तभी बनेगी जब हम जिनवाणी सुनकर अच्छे कार्यों की तरफ कदम आगे बढ़ाने का प्रयास करेंगे। जिंदगी स्मॉर्ट नहीं है तो स्मॉर्ट घड़ी ओर स्मॉर्ट फोन कोई काम नहीं आएंगे। जिंदगी स्मॉर्ट बन गई तो हमारे पास स्मॉर्ट फोन या स्मॉर्ट घड़ी है या नहीं कोई मायने नहीं रखता। द्रोपदी की कहानी जिंदगी को स्मॉर्ट बनाने की कहानी है। ये विचार पुण्यनगरी पूना के आदिनाथ सोसायटी जैन स्थानक भवन ट्रस्ट के तत्वावधान में पारख धर्मसभा मण्डप में शनिवार को श्रमणसंघीय सलाहकार सुमतिप्रकाश महारासा के सुशिष्य आगमज्ञाता प्रज्ञामहर्षि श्री डॉ. समकितमुनिजी म.सा. ने प्रवचनमाला ‘‘कहानी द्रोपदी की-कहानी कर्म की’’ के तहत व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि आजकल हाल बेहाल है, उपर से टिपटॉप लेकिन अंदर से पोलमपोल है। अंदर तो जहर भरा है लेकिन ढक्कन अमृत का लगा है। ऐसे लोगों की संगत करने पर बर्बादी तय है। मुनिश्री ने कहा कि जो दिखने में सुंदर ओर वाणी मीठी हो जरूरी नहीं उनका आचरण व भावना भी सुंदर हो। ऐसे लोगों से स्वयं को नहीं बचा पाए तो हमारी सुख-शांति भी नहीं बच पाएगी। उंची इमारतों में रहने वाला हर कोई ईमानदार नहीं होता ओर कैदखाने में पड़ा हर कोई बेईमान नहीं होता। कोई हालात नहीं समझता तो कोई जज्बात नहीं समझता, कोई कोरा कागज भी पढ़ लेता ओर कोई किताब भी नहीं समझता। समकितमुनिजी ने विभिन्न दृष्टान्तों के माध्यम से जीवन की क्षणभंगुरता के बारे में समझाते हुए कहा कि दुनिया है तो दुःखकारी पर अपने को कहां लगती, जिंदगी के 60-70 साल बीत गए फिर भी मजे लेना बंद नहीं होता। हमारा ध्यान संसार से हटकर धर्म की तरफ नहीं मुड रहा है। जिंदगी यू समझ लो पिघलना तय है लेकिन आइसक्रीम तरह मत बनो कि पिघलने से पहले खाकर मजे लो मोमबत्ती की तरह बनो कि पिघलने से पहले जिंदगी को उजाले से भर दो। बहुत सी उम्र बीत चुकी थोड़ा सा जीवन बाकी है। उसमें कितना ज्यादा धर्म कर सकते इस पर ध्यान दो क्योंकि यमराज कब लेने आ जाए कौन जानता है। धर्मसभा में गायनकुशल जयवंतमुनिजी म.सा. ने भजन ‘‘पल-पल प्रभु का नाम मैं जपता हूं’’ की प्रस्तुति दी। पूज्य प्रेरणाकुशल भवान्तमुनिजी म.सा., सरलमना श्री विजयमुनिजी म.सा., सेवाभावी श्री भूषणमुनिजी म.सा. का भी सानिध्य प्राप्त हुआ। धर्मसभा में बेंगलूरू, पानीपत, भीलवाड़ा आदि स्थानों के साथ पूना महानगर के विभिन्न क्षेत्रों से पधारे हजारों श्रावक-श्राविकाएं मौजूद थे। धर्मसभा का संचालन एवं अतिथियों का स्वागत आदिनाथ स्थानकवासी जैन भवन ट्रस्ट पूना के अध्यक्ष सचिन रमेशचन्द्र टाटीया ने किया। चातुर्मास के तहत 6 अगस्त रविवार को दादा-दादी दिवस मनाते हुए विशेष प्रवचनमाला ‘दादी की दादागिरी’ होगी। इसमें दादा-दादी पोते-पोतियों के साथ प्रवचन में आएंगे। इसी क्रम में 6 अगस्त को ही साताकारी दया दिवस मनाया जाएगा। इस दिन दोपहर एक से तीन बजे तक प्रश्नमंच का आयोजन भी होगा। चातुर्मासिक प्रवचन प्रतिदिन सुबह 8.45 से 9.45 बजे तक हो रहे है। चातुर्मास के तहत आत्मकल्याण के लक्ष्य से सर्वोतभद्र चौमुखी जाप आयोजन भी प्रतिदिन रात 8.30 से 9.30 बजे तक हो रहा है।
समकितमुनिजी ने कहा कि जन्म लेते ही हमारा मरना तो तय है पर अच्छा होगा हम मरने से पहले ही मरने की तैयारियां शुरू कर दे। आप अपना धन किसके नाम करते इससे कोई मतलब नहीं बस यही कहना है अब जीवन का जो समय बचा है उसे धर्म के नाम अर्पित कर दो। एक सोच बना लो अब जीना-मरना धर्म के लिए है। ऐसे में जीवन भी धन्य ओर मरण भी धन्य हो जाएगा। धर्म के लिए जीने का जो सुख मिलेगा उसे बयां नहीं करके अनुभव करने की जरूरत है।
आनंद सप्ताह का एकासन से आगाज, जाप से होगा समापन
पूज्य समकित मुनिजी ने बताया कि श्रमण संघीय आचार्य सम्राट आनंदऋषिजजी म.सा. की जयंति के उपलक्ष्य में आनंद सप्ताह के आयोजन 11 अगस्त को एकासन दिवस के साथ शुरू होंगे। सप्ताह का समापन 17 अगस्त को आनंद जाप के साथ होगा। इस सप्ताह में एकासन, उपवास, आयम्बिल आदि तप साधना के साथ 12,13 एवं 15 अगस्त को कक्षा 9 से लेकर कॉलेज स्तर तक अध्ययनरत बेटियों के लिए विशेष प्रवचनमाला ‘‘पिंकी का क्या होगा’’ का आयोजन होगा। चातुर्मास में 20 अगस्त को युवा सम्मेलन का आयोजन होगा। इसी तरह 27 अगस्त को सामूहिक रक्षाबंधन कार्यक्रम का आयोजन होगा। इसके माध्यम से बेस्ट राखी, बेस्ट भाई-बहन आदि अवार्ड भी प्रदान किए जाएंगे।
बाल तपस्वियों के सम्मान में भक्ति संध्या 12 अगस्त को
चातुर्मास में ढाई वर्ष से 13 वर्ष तक के करीब 170 बच्चों द्वारा 15 दिवसीय द्रव्य मर्यादा तप (चन्द्रकला तप) सातवें दिन शनिवार को भी जारी रहा। सातवें दिन 9 द्रव्य की मर्यादा रही। पूज्य समकितमुनिजी के अनुसार द्रव्य मर्यादा तप करने वाले बच्चों की विशेष क्लास 6 अगस्त रविवार दोपहर 3.30 बजे से रहेगी जिसमें उन्हें आगे की तप विधि के बारे में समझाया जाएगा। निरन्तर घटते क्रम में तप साधना के अंतिम दिन 13 अगस्त को एक द्रव्य का ही उपयोग कर सकेंगे। बच्चों में इस तप को लेकर उत्साह का माहौल है। बाल तपस्वियों के सम्मान में 12 अगस्त को रात 8 बजे से आदिनाथ संघ में भक्ति संध्या का आयोजन किया जाएगा। इस दिन सर्वोतभद्र चौमुखी जाप आयोजन शाम 7 से 8 बजे तक होगा। द्रव्य मर्यादा तप करने वाले बच्चों का आदिनाथ श्रीसंघ द्वारा सम्मान समारोह 13 अगस्त रविवार को होगा। बच्चों को आदिनाथ संघ पार्क से प्रवचन स्थल तक शोभायात्रा के रूप में लाया जाएगा।