प्रतिशोध की भावना से स्वयं की शांति भंग होती है शरीर रोगों का शिकार बनता है – राष्ट्र संत कमल मुनि कमलेश

इंदौर महावीर भवन 5 अगस्त 2023 । जिस आत्मा में जिस के निमित्त से प्रतिशोध की ज्वाला भड़कने लगती हे उससे अगले का नुकसान हो या ना हो परंतु स्वयं जलकर खाक हो जाता है। उक्त विचार राष्ट्र संत कमल मुनि कमलेश ने संबोधित करते कहा कि प्रतिशोध से प्रतिशोध को समाप्त करना आग को आग से बुझाने के समान है।
उन्होंने कहा कि प्रतिशोध की भावना से स्वयं की शांति भंग होती है शरीर रोगों का शिकार बनता है और पवित्र आत्मा को शातिर के रूप में परिवर्तित कर देती है। मुनि कमलेश ने बताया कि खून के रिश्ते में भी कड़वाहट घोल कर आपस में दुश्मन बना देती है प्रतिशोध का दूसरा नाम मौत का सौदागर है। राष्ट्रसंत स्पष्ट कहा कि जहां प्रतिशोध होता है वहां धर्म आराधना विराधना में परिवर्तित और वरदान भी अभिशाप बन जाता है।
जैन संत ने कहा कि प्रतिशोध की भावना विस्फोटक रूप सर्व विनाश को खुला निमंत्रण देना है सरकार और कानून दबा सकता है परंतु समूल नष्ट नहीं कर सकता। अंत ने बताया कि आध्यात्मिक ज्ञान की साधना द्वारा ही नियंत्रण पाया जा सकता है सच्ची सुख शांति और समृद्धि पाई जा सकती है। अखिल भारतीय जैन दिवाकर विचार मंच नई दिल्ली जिला इकाई राजकोट महिला शाखा अध्यक्ष पुष्पा सांखला उपाध्यक्ष इंदिरा संचेती एवं जोधपुर से संघ के पूर्व अध्यक्ष सुकनराज धारीवाल का अभिनंदन किया गया। तपस्या अक्षत मुनि जी के आज आठवां उपवास है। रमेश जी भंडारी ने स्वागत किया प्रकाश भटेवर ने संचालन किया।