
रतलाम। आज ग्राम मोरवानी में बिरसा मुंडा चौराहे पर महाराणा पूजा भील जयंती एवं वीरांगना रानी दुर्गावती जयंती हर्षो उल्लास के साथ श्रद्धा पूर्वक धूमधाम से मनाई गई। सर्वप्रथम वीर महापुरूष बिरसा मुंडा, डॉ भीमराव अंबेडकर, टंट्या भील,रानी दुर्गावती के छाया चित्र पर श्रद्धा सुमन अर्पित कर पुजा अर्चना कर धरती माता की प्रार्थना की गई।
आदिवासी एकता परिषद, अखिल भारतीय भील समाज, जय आदिवासी युवा शक्ति (जयस), आदिवासी छात्र संगठन ,महाराणा पूंजा भील जनकल्याण संगठन, वीर एकलव्य सामाजिक सेवा संस्थान रतलाम के संयुक्त तत्वाधान में कार्यक्रम आयोजित किया गया ।तथा सभी अतिथियों ने कहा कि वीर शिरोमणि महाराणा पूंजा भील सोलवीसदी मे मेवाड़ गांव भोमट राज्य (मेरपुर) मे 5 अक्टूबर को माता केहलीबाई की कोख से जन्म हुआ तथा पिता दूदा होलंकी थे।18 जून 1576 ईसवी में मुगलों का आक्रमण मेवाड़ हल्दीघाटी युद्ध में महाराणा प्रताप की सेना में सबसे बडी ताकत भील सेना की थी। 9000 हजार सैनिकों के साथ अकबर की विशाल 86000 हजार सैनिकों की सेना से गोरिल्ला युद्ध नीति तीरंदाजी वीर योद्धा ओ ने लड़कर अपनी मातृभूमि, देश की रक्षा कर युद्ध जीता। मेवाड़ के भीलो की आन, बान, शान, देशभक्ति की अनूठी मिसाल कायम कर मेवाड़, चितौड़ को गुलामी से मुक्त कराया। महाराणा प्रताप की जान बचाई और। जिनकी ख्याति शौर्य गाथा इतिहास में दर्ज है । चित्तौड़ गड़ के राज्य चिन्ह पर एक तरफ महाराणा पूंजा भील दूसरी तरफ महाराणा प्रताप मूर्ति स्थापित है।
गोंडवाना राज्य की महारानी वीरांगना रानी दुर्गावतीका जन्म 5 अक्टूबर 1524 कालिंजर किला उत्तर प्रदेश में हुआ। जिन्होने मुगलों की सेना लोहा लिया गोड़वाना राज्य की कीर्ति कायम रखा। ऐसे महान महानायक एवम नायिका को आदिवासी समाज कोटि कोटि नमन करते हुए उन्हें याद करते हैं।इस अवसर पर मुख्य_ अतिथि श्रीमती मीराबाई, श्रीमती अनीता वर्मा ,श्रीमती राजु गांधी, श्रीमती अंजना राठौर ,प्रकाश भूरिया, शंकर लाल हाडा ,राहुल पहाड़िया, कन्हैयालाल, विक्रम सिंगार, कीर्ति सिंगर, तनीषा हाडा, चंदा सिंगर, छाया गढ़वाल, अंजलि सिंगर, रानू मॉल, अर्पिता सिंगर, रितिका सिंगर, किरण सिंगर, समाजसेवी सुरतलाल डामरआदि बडी संख्या में उपस्थित थे।