श्रीमद् भागवत कथा में श्री कृष्ण-रुकमणी विवाह हर्षोल्लासपूर्वक मनाया गया

रतलाम। गुरु के सानिध्य में रहकर गुरु के साथ रहकर जो सीख जाता है वो जीवन भर काम आता है जिस पर गुरु की कृपा हो जाए, उसका जीवन संवर जाता है। जीवन में गुरु का होना जरूरी है, गुरु अज्ञानता का निवारण करने, धर्म का मार्ग दिखाने में हमारी सहायता करते हैं। इसलिए जीवन में गुरु का सानिध्य प्राप्त करना जरूरी है। उक्त बात भगवताचार्य पं. योगेश्वर शास्त्री ने (संस्थापक साकेतधाम) ने श्री मेढ़ क्षत्रीय मारवाड़ी स्वर्णकार समाज द्वारा आयोजित संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा में कहीं ।
श्री शेषनारायण मंदिर भरावा की कुई पर आयोजित भागवत कथा में आज रुकमणी-श्रीकृष्ण विवाह, श्रीकृष्ण बलराम लीला, कंस वध आदि का वर्णन किया गया । संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा में श्री कृष्णा- रुकमणी का विवाह प्रतीकात्मक रूप से किया गया। जिसमे बालिकाओं ने श्रीकृष्ण-रुकमणी बनकर आकर्षक प्रस्तुति दी। इस अवसर पर पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया, महिलाओं ने भजनों के साथ नृत्य कर विवाह की खुशियां मनाई।
इस अवसर पर संस्थापक अध्यक्ष नवनीत सोनी, जयदिप भामा, संजय अग्रोहा, जगदीश भामा, संजय अग्रोया, राजकुमार बेवाल, शैलेष जलोतिया, गंगाधर जांगलवा, रमेश सोनी, संजय सोलीवाल, मुकेश जलोदिया, राजेश भामा, मोतीलाल मींडिया, मुकेश अग्रोया, तेजकरण सोलीवाल, भुपेन्द्र मंडावरा, श्यामसुंदर सदेवड़ा, राजेन्द्र अग्रोया आदि न्यास पदाधिकारियों एवं सदस्यगण सहित बड़ी संख्या में धर्मालुजन उपस्थित थे ।