रतलाम। श्री देवसुर तपागच्छ चारथुई श्रीसंघ, गुजराती उपाश्रय एवं श्री ऋषभदेवजी केशरीमलजी जैन श्वेतांबर पेढ़ी, रतलाम के तत्वावधान में परम पूज्या साध्वी श्री हेमप्रज्ञाश्रीजी म.सा. की पावन निश्रा एवं प्रेरणा से श्री करमचंदजी उपाश्रय, हनुमान रुंडी के पीछे रतलाम में प्रथम बार गिरनार महातीर्थ की भव्य रचना का निर्माण किया गया है। यहां भगवान श्री नेमिनाथ परमात्मा की हुबहू प्रतिमा स्थापित की गई है।
मुंबई एवं इंदौर के कारीगरों द्वारा 10 दिनों से अधिक समय तक अथक मेहनत कर गिरनार तीर्थ की आकर्षक एवं भव्य रचना तैयार की गई। इसमें गिरनार तीर्थ की तलेटी, सहसावन, पंच तीर्थों की रचना सहित विभिन्न धार्मिक स्थलों को स्वरूप दिया गया है। साथ ही श्री नागेश्वर पार्श्वनाथ प्रभु की हुबहू प्रतिमा भी श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है।
आयोजन के तहत 2 अक्टूबर से 10 अक्टूबर 2026 तक प्रतिदिन सूर्योदय से सूर्यास्त तक 99 यात्रा आराधकों द्वारा नव्वाणु यात्रा की जा रही है। प्रतिदिन प्रातः 8 बजे प्रभु श्री नेमिनाथजी परमात्मा का भव्य अभिषेक एवं पूजन किया जा रहा है। सायंकाल भक्ति के पश्चात भव्य आरती का आयोजन होता है।
आयोजन समिति ने बताया कि सभी धर्मालुजन प्रातः से रात्रि तक गिरनार महातीर्थ की रचना के दर्शन एवं वंदन का लाभ ले सकते हैं। श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर इस धार्मिक आयोजन का लाभ लेने का आह्वान किया गया है।
इस आयोजन के मुख्य लाभार्थी स्व. श्री दिलीपजी एवं स्व. श्री शैलेन्द्रजी सिपाणी के आत्मश्रेयार्थ श्री नाथूलालजी देवेंद्रकुमारजी सिपाणी परिवार, रतलाम, नवकार स्टोन एवं नवकार सेल्स हैं।