तपस्या मुक्ति का आधार, तपस्या आत्मा का श्रृंगार, बोलो तपस्वी की जय-जयकार

  • साध्वी हिरलप्रभाजी के नौ की तपस्या पर साध्वीमण्डल ने प्रदान की तरूण तपस्वी की उपाधि
  • रूप रजत विहार में तप अनुमोदना के लिए उमड़े श्रावक-श्राविकाएं, छाया भक्ति का रंग

भीलवाड़ा, 8 अगस्त (निलेश कांठेड़) । तपस्या जीवन से मुक्ति का आधार है। तपस्वी धर्मवान को सम्मान तो देवता भी करते है। सम्मान हमेशा तपस्या करने वालों का होता है। तपस्या आत्मशुद्धि व कर्मनिर्जरा का सबसे बड़ा माध्यम है। तपस्या संत-साध्वी करें या श्रावक-श्राविका सभी के लिए साताकारी व अनुमोदनीय होती है। जो तपस्या नहीं कर सकते वह अनुमोदना करके भी पुण्यार्जन कर सकते है। तपस्या की अनुमोदना का अवसर भी कभी छोड़ना नहीं चाहिए। ये विचार भीलवाड़ा के चन्द्रशेखर आजादनगर स्थित रूप रजत विहार में मंगलवार को मरूधरा मणि महासाध्वी श्रीजैनमतिजी म.सा. की सुशिष्या महासाध्वी इन्दुप्रभाजी म.सा. ने नवदीक्षिता साध्वी हिरलप्रभाजी म.सा. के प्रथम बार नौ उपवास की तपस्या करनें एवं चातुर्मास आयोजक श्री अरिहन्त विकास समिति के अध्यक्ष राजेन्द्र सुकलेचा के अठाई तप की साधना के उपलक्ष्य में आयोजित तप अनुमोदना समारोह में व्यक्त किए। तपस्वियों की अनुमोदना करने के लिए भीलवाड़ा शहर के विभिन्न क्षेत्रों से सैकड़ो श्रावक-श्राविकाएं रूप रजत विहार में उमड़े। गीतों व भजनों के माध्यम से तपस्वियों की अनुमोदना करते हुए तप का महत्व बताया गया। धर्मसभा में आगम मर्मज्ञा डॉ. चेतनाश्रीजी म.सा. ने नवदीक्षिता हिरलप्रभाजी की तपस्या की अनुमोदना करते हुए कहा कि साध्वी मण्डल द्वारा इस अवसर पर उन्हें तरूण तपस्वी की उपाधि प्रदान की जा रही है। साध्वी मण्डल द्वारा ‘लाड़ली’ हिरलप्रभाजी म.सा.को आदर की शॉल ओढ़ा उनके पहली बार तेले से बड़ी तप साधना करने की अनुमोदना की गई। साध्वी चेतनाश्रीजी ने कहा कि तपस्या का महत्व पहले भी था, आज भी है ओर कल भी रहेगा। मन मजबूत हो तो लक्ष्य की प्राप्ति अवश्य होती है। शरीर को स्वस्थ रखने में तपस्या की भूमिका अहम है। मधुर व्याख्यानी डॉ. दर्शनप्रभाजी म.सा. ने कहा जब तक हम इच्छाओं का निरोध नहीं करेंगे तप नहीं हो सकता। तपस्या जिनशासन का श्रृंगार व मोक्ष का द्वार है। तप की अनुमोदना करने से तप की अन्तराय टूटती है। धर्मसभा में तत्वचिंतिका डॉ. समीक्षाप्रभाजी म.सा. ने कहा कि तप करने के लिए शरीर नहीं मन की मजबूती जरूरी है ये साध्वी हिरलप्रभाजी ने 19 वर्ष की उम्र में नौ की तपस्या करके दिखा दिया है। धर्मसभा में समीक्षाप्रभाजी जब हिरलप्रभाजी को उठाकर पाट तक लाए तो माहौल तपस्वी के जयकारों से गूंजायमान हो उठा। आदर्श सेवाभावी दीप्तिप्रभाजी म.सा. ने भी तप की अनुमोदना में भजन प्रस्तुत किया। करीब 15 माह पूर्व दीक्षा अंगीकार करने वाली साध्वी हिरलप्रभाजी के तपस्या करने पर उनके सांसारिक परिवार व धर्म परिवार से भी परिजन अनुमोदना के लिए पहुंचे।
श्रीसंघ अध्यक्ष सुकलेचाजी का अठाई तप पर स्वागत-सम्मान
धर्मसभा में श्री अरिहन्त विकास समिति के अध्यक्ष सुश्रावक राजेन्द्र सुकलेचा ने 8 उपवास के प्रत्याख्यान ग्रहण किए तो अनुमोदना में हर्ष-हर्ष, जय-जय के जयकारे गूंज उठे। उनका तपस्या की बोली लगाकर सम्मान किया गया। श्री अरिहन्त विकास समिति के पदाधिकारियों ने भी उनका भावपूर्ण सम्मान व अभिनंदन किया। इनके अलावा भी भीलवाड़ा शहर की विभिन्न संस्थाओं व श्रावक-श्राविकाओं द्वारा भी शॉल ओढ़ा व माल्यापर्ण कर उनका स्वागत किया गया। साध्वी इन्दुप्रभाजी ने कहा कि ये भी संयोग रहा कि साध्वी हिरलप्रभाजी की तपस्या में सहयोग श्रीसंघ के अध्यक्षजी ने अठाई तप से किया। धर्मकार्य में इससे बड़ा साथ नहीं हो सकता। धर्मसभा में जैन कॉन्फ्रेंस महिला शाखा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष लाड़जी मेहता, अरिहन्त विकास समिति के नवरतनमल बापना, अरूण दुग्गड़ आदि ने विचार व्यक्त करते हुए तपस्वी साध्वी एवं सुश्रावक सुकलेचाजी के तप की अनुमोदना की। सुश्राविका सुनिता सुकलेचा एवं महिला मण्डल की सदस्यों ने अनुमोदना गीत भी प्रस्तुत किया। समारोह में वरिष्ठ सुश्रावक नवरतनमल बम्ब, सुश्राविका बलवीर चौरड़िया, मंजू पोखरना, मंजू खटवड़ सहित चैन्नई, मारवाड़, सरवाड़, अंटाली, बिजयनगर आदि स्थानों से पधारे श्रावक-श्राविका भी मौजूद थे। धर्मसभा का संचालन श्रीसंघ के मंत्री सुरेन्द्र चौरड़िया एवं युवक मण्डल के मंत्री गौरव तातेड़ ने किया। तपस्वियों की अनुमोदना में मंगलवार दोपहर भी रूप रजत विहार में चौबीसी का आयोजन किया गया। चातुर्मासिक नियमित प्रवचन प्रतिदिन सुबह 8.45 बजे से 10 बजे तक हो रहे है। प्रतिदिन सूर्योदय के समय प्रार्थना का आयोजन हो रहा है। प्रतिदिन दोपहर 2 से 3 बजे तक नवकार महामंत्र जाप हो रहा है।
सर्वव्याधि निवारक घण्टाकर्ण महावीर स्रोत का जाप
रूप रजत विहार में मंगलवार को तप अनुमोदना समारोह से पूर्व सुबह 8.30 बजे से सर्वसुखकारी व सर्वव्याधि निवारक घण्टाकर्ण महावीर स्रोत जाप का आयोजन किया गया। तत्वचिंतिका डॉ.समीक्षाप्रभाजी म.सा. ने ये जाप सम्पन्न कराया। इसमें बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने भाग लेकर सभी तरह के शारीरिक कष्टों के दूर होने एवं सर्वकल्याण की कामना की। चातुुर्मासकाल में प्रत्येक मंगलवार को सुबह 8.30 से 9.15 बजे तक इस जाप का आयोजन हो रहा है।
सामूहिक तेला तप साधना 24 अगस्त से
श्रमण संघीय आचार्य सम्राट आनंदऋषिजी म.सा. की जयंति पर 17 अगस्त को देश में एक लाख आठ हजार आयम्बिल तप आराधना में भीलवाड़ा के रूप रजत विहार से भी अधिकाधिक सहभागिता हो इसके लिए साध्वीमण्डल निरन्तर प्रेरणा प्रदान कर रहा है। इस दिन हर घर से कम से कम एक आयम्बिल अवश्य हो इसके लिए प्रेरणा प्रदान की जा रही है। चातुर्मास में मरूधर केसरी मिश्रीमलजी म.सा. की 133 वी जयंति एवं पुण्यस्मृति दिवस एवं लोकमान्य संत शेरे राजस्थान रूपचंदजी म.सा. की 96वी जयंती के उपलक्ष्य में 24 से 26 अगस्त तक सामूहिक तेला तप साधना होगी। इस दौरान कई श्रावक-श्राविका तेला तप करने के लिए भावना जता चुके है।